पीएम मोदी ने नामीबिया के संस्थापक और प्रथम राष्ट्रपति डॉ. सैम नुजोमा को श्रद्धांजलि की अर्पित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया के राष्ट्रीय स्मारक ‘हीरोज़ एकर’ पर जाकर देश के संस्थापक और प्रथम राष्ट्रपति डॉ. सैम नुजोमा को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री मोदी पहली बार नामीबिया की यात्रा पर हैं जबकि भारत से तीसरी बार कोई प्रधानमंत्री यात्रा कर रहा है। पीएम मोदी की पांच देशों की राजकीय यात्रा का नामीबिया अंतिम पड़ाव है। इसके बाद पीएम मोदी सीधे भारत आएंगे।

पीएम मोदी ने बुधवार को नामीबिया के संस्थापक और प्रथम राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. सैम नुजोमा को श्रद्धांजलि को अर्पित की। डॉ. सैम नुजोमा 15 वर्षों तक राष्ट्रपति पद पर रहे। इस साल फरवरी में उनका निधन 95 वर्ष की उम्र में हुआ। डॉ. सैम नुजोमा ने 1990 में नामीबिया को अंग्रेजी हुकूमत से आजादी दिलाई थी।

इससे पहले पीएम का नामीबिया के विंडहोक में भव्य औपचारिक स्वागत किया गया। पीएम मोदी को गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया गया। औपचारिक स्वागत के दौरान पीएम मोदी को 21 तोपों की सलामी गई। प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान अफ्रीकी देश की राष्ट्रपति नेटुम्बो नंदी-नदैतवाह ने उनका भव्य स्वागत किया। यह स्वागत समारोह उनके नामीबिया की एक दिवसीय यात्रा के दौरान आधिकारिक कार्यक्रमों की शुरुआत के दौरान किया गया।

इसे लेकर पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि नामीबिया में भारतीय समुदाय भारत-नामीबिया की घनिष्ठ मित्रता को लेकर बेहद आशावादी है और विंडहोक में हुए विशेष स्वागत में यह झलकता है। मुझे अपने प्रवासी समुदाय पर खासकर जिस तरह से उन्होंने अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव बनाए रखा है, उस पर गर्व है।

प्रधानमंत्री मोदी अपनी पांच देशों की यात्रा के अंतिम चरण में नामीबिया पहुंचे। होसे कुटाको इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उनका भव्य पारंपरिक स्वागत किया गया, जहां नामीबिया की इंटरनेशनल रिलेशंस एंड कोऑपरेशन मिनिस्टर सेल्मा अशीपाला-मुसावी ने उनका स्वागत किया। स्वागत समारोह में स्थानीय संगीतकारों और नर्तकों ने प्रस्तुति दी तथा तालियों एवं जयकारों से गूंजते इस क्षण में प्रधानमंत्री भी कलाकारों के साथ शामिल हो गए।

यह प्रधानमंत्री मोदी की नामीबिया की पहली यात्रा है और पिछले 27 सालों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह तीसरी यात्रा है। भारत और नामीबिया के बीच लंबे समय से बहुत मजबूत संबंध रहे हैं और नई दिल्ली ने नामीबिया को उसकी स्वतंत्रता से बहुत पहले ही मान्यता दे दी थी। साथ ही 1946 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी इसका मुद्दा उठाया था।

दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार मुख्यतः जस्ता और हीरा प्रसंस्करण जैसे खनिज संसाधनों में होता है। नामीबिया एक संसाधन समृद्ध देश है। इसमें यूरेनियम, तांबा, कोबाल्ट, दुर्लभ मृदा, लिथियम, ग्रेफाइट, टैंटालम जैसे प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं। भारत ने नामीबिया से कुछ चीते भी लाए थे और उन्हें मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा गया।