PM मोदी के 4078 दिन: केवल बीते वर्षों की उपलब्धि नहीं, आने वाले दशकों की दिशा भी

26 मई 2014 को जो हुआ, वह भारतीय राजनीति के इतिहास में निर्णायक क्षण था। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी इतिहास, परंपरा और लोकतंत्र की सबसे बड़ी प्रयोगशाला में दिल्ली पहुंचे। 25 जुलाई 2025 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का लगातार कार्यकाल (4077 दिन) पीछे छोड़ते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में अपने 4078 दिन पूरे कर लिए।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ प्रधानमंत्री मोदी न केवल स्वतंत्र भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार पद पर बने रहने वाले दूसरे प्रधानमंत्री बन गए हैं, बल्कि उनके नेतृत्व ने देश में एक ऐसे युग की शुरुआत की है जिसे अब केवल शासन या विकास से नहीं, बल्कि विचारधारा, दृष्टिकोण और निर्णायक नेतृत्व की कसौटी पर परखा जा रहा है।

इन 4078 दिनों में भारत में क्या कुछ बदल गया?

असल में यह आंकड़ा एक व्यापक परिवर्तन का संकेतक है, जो न केवल शासन शैली में बल्कि देश के आत्मविश्वास और वैश्विक छवि में भी परिलक्षित होता है। यह सवाल केवल आंकड़ों या योजनाओं की गणना से तय नहीं होता, बल्कि इससे तय होता है कि आम भारतीय का जीवन कितना बदला है, देश ने खुद को वैश्विक मंच पर कैसे प्रस्तुत किया है और क्या देश एक दीर्घकालिक रणनीतिक सोच की दिशा में बढ़ सका है? तमाम ऐसे फैसले हैं जो नरेंद्र मोदी सरकार के शासनकाल की न केवल नींव हैं, बल्कि ‘मोदी युग’ के उस विचार की पुष्टि भी करती हैं, जो जनता के साथ सीधा संवाद बनाकर, निर्णायक फैसलों से और राष्ट्रवादी दृष्टिकोण के साथ भारत को एक नई दिशा में ले जाने का दावा करता है।

विकास का ‘डिजिटल’ मॉडल

2014 से पहले भारत में डिजिटल शब्द केवल शहरी वर्ग की सुविधा से जुड़ा था लेकिन आज आधार, डिजिलॉकर, भीम ऐप, रूपे कार्ड, CoWIN और ONDC जैसे प्लेटफॉर्म भारत की आर्थिक, प्रशासनिक और नागरिक संरचना का हिस्सा बन चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल इंडिया को एक साधन नहीं, बल्कि सामाजिक समावेशन का औजार बना दिया है।

यह केवल इंटरनेट कनेक्शन देने की योजना नहीं थी, बल्कि भारत के लोकतंत्र को तकनीकी पारदर्शिता से जोड़ने की रणनीति थी जो भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में कारगर रही।

भारत की वैश्विक पुनर्स्थापना

G20 अध्यक्षता, चंद्रयान-3 की सफलता, ऑपरेशन कावेरी और ऑपरेशन गंगा जैसे अभियान, अफ्रीकी देशों में सक्रियता और रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत की तटस्थ कूटनीति- ये सब प्रधानमंत्री मोदी के उस विदेश नीति दृष्टिकोण को दर्शाते हैं जिसमें ‘भारत फर्स्ट’ और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ दोनों का सामंजस्य है। आज भारत न तो वैश्विक दक्षिण की आवाज़ भर है, न ही किसी गुट की छाया बल्कि वह निर्णायक, संतुलित और अपने हितों के प्रति सजग राष्ट्र के रूप में उभरा है।

गरीबी से लड़ाई, गरिमा से समाधान

प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन और आयुष्मान भारत इन योजनाओं ने गरीबी के खिलाफ भारत की लड़ाई को केवल सरकारी सहायता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि गरिमामय जीवन की बुनियाद रखी।
आज जब विश्व बैंक भारत के ‘मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी’ में तेज़ गिरावट की पुष्टि करता है, तो इसके पीछे इन योजनाओं की निर्णायक भूमिका को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

कोरोना प्रबंधन और टीकाकरण अभियान

जहां वैश्विक ताकतें COVID-19 से जूझती रहीं, भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में न केवल रिकॉर्ड टीकाकरण किया बल्कि दुनिया के कई देशों को ‘वैक्सीन मैत्री’ के तहत मदद भी दी। कोरोना काल में लिए गए त्वरित निर्णयों ने यह सिद्ध किया कि भारत केवल संकट में प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं बल्कि दुनिया का मार्गदर्शक बन सकता है।

नवाचार को संस्थागत समर्थन

‘स्टार्टअप इंडिया’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘राष्ट्रीय अनुसंधान एवं नवाचार नीति’ जैसी पहलों ने भारत में उद्यमशीलता और रिसर्च का नया युग शुरू किया। 2024 तक भारत स्टार्टअप्स की संख्या में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है। 2014 में जिसे जॉब सीकर की अर्थव्यवस्था कहा जाता था, वह आज ‘जॉब क्रिएटर’ बन चुकी है।

सैन्य और सामरिक मजबूती

ऑपरेशन सिंदूर, बालाकोट स्ट्राइक, एलएसी पर मजबूती से खड़ा रहना, राफेल विमानों की तैनाती, स्वदेशी रक्षा उत्पादन में निवेश- इन सभी ने भारत को एक नई सैन्य आत्मनिर्भरता और निर्णायक नेतृत्व की छवि दी है। मोदी युग की संप्रभुता से समझौता नहीं करना ही बड़ी विशेषता रही है।

न्याय प्रणाली में तकनीकी क्रांति

ई-कोर्ट्स, डिजिटल केस फाइलिंग और न्यायिक प्रक्रिया की सरलता पर जोर ये वो सुधार हैं जो आम नागरिक को न्याय के करीब लाने की दिशा में उठाए गए हैं। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में न्याय प्रणाली में भी पारदर्शिता, पहुंच और तकनीक का प्रयोग दिखाई पड़ता है।

संस्कृति और विरासत का पुनर्जागरण

राम मंदिर निर्माण, केदारनाथ पुनर्निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, सोमनाथ का नवीनीकरण ये केवल धार्मिक परियोजनाएं नहीं हैं, बल्कि सांस्कृतिक आत्मसम्मान के पुनर्स्थापन की दिशा में मील के पत्थर हैं। भारत ने आज अपने इतिहास को पुनर्परिभाषित किया है, जिसे गर्व से देखा जा रहा है।

महिला सशक्तिकरण की नीति आधारित पहल

सुकन्या समृद्धि योजना, मुद्रा योजना, महिला SHGs को बढ़ावा, मातृत्व लाभ में वृद्धि साबित करता है कि प्रधानमंत्री मोदी का महिला सशक्तिकरण केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहा। आज महिला नेतृत्व पंचायतों से लेकर नीति आयोग तक दिखता है। यह सत्ता में भागीदारी और अधिकार का युग है।

पर्यावरण और ऊर्जा में वैश्विक नेतृत्व

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, नेट ज़ीरो की घोषणा, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर जोर प्रधानमंत्री मोदी का पर्यावरणीय दृष्टिकोण वैश्विक प्रतिबद्धता के साथ-साथ घरेलू ऊर्जा आत्मनिर्भरता का भी सूचक है।

‘मोदी मॉडल’ एक व्यापक राष्ट्र-परियोजना

इन 4078 दिनों में प्रधानमंत्री मोदी की छवि एक प्रशासनिक प्रमुख से कहीं बढ़कर एक विचार के रूप में उभरी है। उन्होंने शासन को केवल सरकारी आदेशों की प्रक्रिया नहीं रहने दिया, बल्कि उसे सामाजिक चेतना और राष्ट्र निर्माण के औजार में बदल दिया।

भारत की राजनीति में एक बात निर्विवाद है कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश की सामूहिक चेतना को एक लक्ष्य की ओर केंद्रित करने का काम किया है। जब भारत 2025 में वैश्विक मंच पर निर्णायक भूमिका की ओर बढ़ रहा है तो पीएम मोदी के 4078 दिन केवल बीते वर्षों की कहानी नहीं हैं बल्कि आने वाले दशकों की दिशा भी हैं।

यह युग केवल शासन का नहीं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का युग है। और इसकी पटकथा मोदी युग में लिखी गई है।

–(वरिष्ठ पत्रकार अमित शर्मा की राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राजनीतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ है। वर्तमान में वे प्रसार भारती न्यूज़ सर्विस के साथ जुड़े हैं।)

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