19/12/25 | 5:00 pm

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एआई की ताकत से भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था 2030 तक 1.2 ट्रिलियन डॉलर की ओर

भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2029-30 तक करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। इसका सबसे बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती क्षमता और इसका व्यापक उपयोग है, जो आने वाले समय में देश की प्रगति को नई दिशा देगा। यह जानकारी शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।

भारत का एआई बाजार वर्ष 2027 तक लगभग 17 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है

टीमलीज डिजिटल की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का एआई बाजार वर्ष 2027 तक लगभग 17 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। साथ ही, एआई पेशेवरों की संख्या भी करीब 12.5 लाख तक पहुंचने की उम्मीद है, जो वैश्विक एआई टैलेंट का लगभग 16% होगा। इससे स्पष्ट है कि भारत इस क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो रहा है।

उच्च मूल्य वाली एआई भूमिकाओं में तेजी से वृद्धि

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह तेज़ वृद्धि मुख्य रूप से एंटरप्राइज एआई पर बढ़ते खर्च, राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म और मजबूत एसटीईएम शिक्षा पाइपलाइन के कारण हो रही है। उच्च मूल्य वाली एआई भूमिकाओं में तेजी से वृद्धि हो रही है, जबकि पारंपरिक नौकरियों की मांग अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है।

रिपोर्ट में छह प्रमुख एआई स्किल्स का उल्लेख

रिपोर्ट में छह प्रमुख एआई स्किल्स का उल्लेख किया गया है, जिनकी वर्ष 2026 में सबसे अधिक मांग रहने की संभावना है। इनमें सिमुलेशन गवर्नेंस (26-35 लाख रुपए प्रति वर्ष तक वेतन), एजेंट डिजाइन (25-32 लाख रुपए प्रति वर्ष), एआई ऑर्केस्ट्रेशन (24-30 लाख रुपए प्रति वर्ष), प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग (22-28 लाख रुपए प्रति वर्ष), एलएलएम सेफ्टी एंड ट्यूनिंग (20-26 लाख रुपए प्रति वर्ष) और एआई कंप्लायंस एंड रिस्क ऑपरेशंस (18-24 लाख रुपए प्रति वर्ष) शामिल हैं।

वैश्विक स्तर पर लगभग 40% नौकरियों पर एआई का प्रभाव पड़ने की उम्मीद

रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर लगभग 40% नौकरियों पर एआई का प्रभाव पड़ने की उम्मीद है, विशेष रूप से आईटी सेवाओं, हेल्थकेयर, बीएफएसआई (बैंकिंग, फाइनेंस और इंश्योरेंस) तथा कस्टमर एक्सपीरियंस से जुड़े क्षेत्रों में।

एआई केवल डेटा साइंस तक सीमित नहीं

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कंपनियां अब एआई को केवल डेटा साइंस तक सीमित नहीं रख रही हैं, बल्कि इसे नेतृत्व, संचालन, जोखिम प्रबंधन और अनुपालन जैसे क्षेत्रों में भी लागू कर रही हैं। इसके चलते बड़े पैमाने पर कौशल विकास और मानव-एआई वर्कफ्लो पर जोर दिया जा रहा है।

एंटरप्राइज-ग्रेड एआई स्किल्स की सबसे अधिक मांग

सबसे अधिक मांग सामान्य एआई भूमिकाओं के बजाय एंटरप्राइज-ग्रेड एआई स्किल्स की है, जो गवर्नेंस, भरोसे, समन्वय और स्केलेबिलिटी के लिए आवश्यक हैं। इन कौशलों की मांग बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे प्रमुख शहरों में अधिक है, जहां ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, एआई-फर्स्ट स्टार्टअप्स और बड़े एंटरप्राइज सक्रिय हैं।

गवर्नेंस, समन्वय और वास्तविक व्यावसायिक जरूरतों से जोड़ने में मिड-लेवल प्रोफेशनल्स सक्षम

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मिड-लेवल प्रोफेशनल्स की भूमिका लगातार बढ़ रही है, क्योंकि वे व्यावहारिक एआई को गवर्नेंस, समन्वय और वास्तविक व्यावसायिक जरूरतों से जोड़ने में सक्षम हैं। (इनपुट: आईएएनएस)