आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के तोतापुरी आम उत्पादक किसानों की आय में गिरावट और मंडियों में कीमतें टूटने की समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने व्यापक सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए तोतापुरी आम की खेती, प्रसंस्करण और विपणन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
विशेषज्ञ समिति ने किया जमीनी सर्वेक्षण
शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर गठित विशेषज्ञ समिति ने 8 से 10 जुलाई के बीच आंध्र प्रदेश के तिरुपति और चित्तूर जिलों का दौरा कर किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), मंडी प्रतिनिधियों, पल्प निर्माण इकाइयों, निर्यातकों और जिला प्रशासन से बातचीत की। समिति ने खेतों से लेकर मंडियों और प्रसंस्करण इकाइयों तक पूरी मूल्य श्रृंखला का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
कीमतों में गिरावट के कारण बताए
समिति ने पाया कि इस वर्ष तोतापुरी आम की कीमतों में गिरावट के पीछे प्रमुख कारणों में प्रसंस्करण क्षमता और खरीद व्यवस्था में समन्वय की कमी, आम आधारित पेयों में वास्तविक आम गूदे (पल्प) का कम उपयोग तथा वैश्विक बाजार की परिस्थितियां शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि सीजन की शुरुआत में समय पर खरीद नहीं होने से बड़ी मात्रा में उपज एक साथ बाजार पहुंचती है, जिससे कीमतों में भारी गिरावट आती है।
आम आधारित पेयों में 22–25 प्रतिशत गूदा अनिवार्य करने की सिफारिश
समिति ने सुझाव दिया कि आम आधारित पेयों में 22 से 25 प्रतिशत तक वास्तविक आम का गूदा अनिवार्य किया जाए। साथ ही सिफारिश की गई कि निर्धारित मात्रा से अधिक गूदा वाले उत्पादों को ही 5 प्रतिशत जीएसटी का लाभ मिले, जबकि कम गूदे वाले उत्पादों पर अधिक जीएसटी लगाया जाए। केंद्रीय मंत्री ने इस प्रस्ताव पर विचार के लिए एफएसएसएआई, जीएसटी परिषद, वित्त मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, कृषि मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय की अंतर-मंत्रालयी बैठक बुलाने के निर्देश दिए।
मूल्य स्थिरीकरण के लिए केंद्रीय समिति बनेगी
तोतापुरी आम की मूल्य श्रृंखला को व्यवस्थित करने के लिए केंद्रीय समन्वय एवं मूल्य स्थिरीकरण समिति गठित करने की सिफारिश की गई है। यह समिति हर वर्ष आम सीजन से पहले उत्पादन, प्रसंस्करण, निर्यात मांग, लागत और बाजार की स्थिति की समीक्षा कर किसानों के लिए संकेतात्मक फार्म-गेट खरीद मूल्य और मैंगो पल्प के संदर्भ मूल्य तय करने में मदद करेगी।
पुराने बागों के कायाकल्प की योजना
बैठक में बताया गया कि आंध्र प्रदेश के चित्तूर, तिरुपति, अन्नमय्या और कडप्पा जिलों में बड़ी संख्या में तोतापुरी के पुराने बाग हैं, जिनकी उत्पादकता कम हो गई है। इसे देखते हुए समिति ने टॉप-वर्किंग तकनीक अपनाकर नीलम, अल्फांसो, हिम्मायत, बंगनपल्ली जैसी उच्च मूल्य वाली किस्मों की कलम लगाने की सिफारिश की। साथ ही क्लस्टर स्तर पर गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिस (जीएपी), किसानों के प्रशिक्षण और प्रदर्शन उद्यान विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
फ्रूट बैग और जोनल खरीद व्यवस्था पर जोर
फलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए शुरुआती चरण में लगभग 23,333 हेक्टेयर क्षेत्र में फ्रूट बैग उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि फलों की गुणवत्ता बेहतर हो और उन्हें प्रीमियम बाजारों तक पहुंचाया जा सके। समिति ने जोनल खरीद व्यवस्था विकसित करने और एफपीओ, उद्यानिकी विभाग तथा प्रसंस्करण उद्योग के संयुक्त प्रयासों से वार्षिक खरीद योजना तैयार करने की भी सिफारिश की।
प्रोसेसिंग इकाइयों के लिए एसओपी का सुझाव
आंध्र प्रदेश सरकार को सुझाव दिया गया है कि सभी पंजीकृत प्रसंस्करण इकाइयों के लिए हर वर्ष 15 मई से खरीद और पल्प निर्माण शुरू करना अनिवार्य करने संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की जाए, ताकि किसानों की उपज समय पर खरीदी जा सके।
एफपीओ आधारित प्रोसेसिंग और मूल्य संवर्धन पर फोकस
बैठक में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से प्रोसेसिंग इकाइयों को बढ़ावा देने और आम के बीज से ‘मैंगो बटर’ सहित अन्य मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। इससे किसानों की अतिरिक्त आय के नए स्रोत विकसित किए जा सकेंगे।
निर्यात रणनीति होगी मजबूत
एपीडा (APEDA) ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के विस्तार तथा समुद्री मार्ग से निर्यात लागत कम करने के प्रयासों की जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिया कि एपीडा, आईसीएआर और राज्य सरकारों के सहयोग से तोतापुरी आम और उसके प्रसंस्कृत उत्पादों के लिए समन्वित निर्यात एवं विपणन रणनीति तैयार की जाए।
किसान-केंद्रित होगी पूरी मूल्य श्रृंखला
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार तोतापुरी आम की पूरी मूल्य श्रृंखला को किसान-केंद्रित बनाना चाहती है। उन्होंने भरोसा जताया कि केंद्र और राज्य सरकारों, आईसीएआर, एपीडा, एफपीओ और प्रसंस्करण उद्योग के समन्वित प्रयासों से आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के तोतापुरी आम उत्पादक किसानों की आय में स्थायी वृद्धि होगी और भारतीय आम की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी। (इनपुट: पीआईबी)


