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एशिया में सहयोग बढ़ाकर ऊर्जा संकट से निपटने की तैयारी

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग की इस हफ्ते भारत और वियतनाम यात्रा से साफ हुआ कि देश अब ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और कच्चे माल की सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है।

राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने छह दिन की यात्रा शुक्रवार को समाप्त की। इस दौरान उन्होंने दोनों तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं के साथ बैठक कर आर्थिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इन देशों को दक्षिण कोरिया के लिए अहम माना जा रहा है, खासकर सप्लाई चेन को मजबूत करने और जरूरी खनिज हासिल करने के लिए।

यह यात्रा ऐसे समय में हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव आठवें हफ्ते में पहुंच चुका है। इससे ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हुई है और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम रास्तों को लेकर चिंता बढ़ गई है, जहां से दक्षिण कोरिया अपने तेल का बड़ा हिस्सा आयात करता है।

भारत में राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों देशों ने ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), वित्त और शिपबिल्डिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने कहा कि मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति को देखते हुए दोनों देश ऊर्जा और कच्चे माल की स्थिर सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेंगे।

इसके अलावा, दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को अपग्रेड करने की बातचीत तेज करने का फैसला किया। लक्ष्य है कि द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 50 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए, जो अभी करीब 25 अरब डॉलर है।

इस बैठक के दौरान 15 समझौते (MoUs) पर हस्ताक्षर हुए। खास बात यह रही कि भारत में संयुक्त रूप से शिपयार्ड बनाने की दिशा में भी सहमति बनी।

वहीं, वियतनाम की राजधानी हनोई में राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने वहां के नेता तो लाम से मुलाकात की। यह उनकी राष्ट्रपति बनने के बाद पहली विदेशी यात्रा थी।

दोनों देशों ने ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर दिया, ताकि मध्य पूर्व के तनाव से होने वाले असर को कम किया जा सके।

वियतनाम दक्षिण कोरियाई कंपनियों के लिए एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बन चुका है और चीन पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

दोनों देशों ने 2030 तक व्यापार को 150 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य दोहराया, जो पिछले साल 94.6 अरब डॉलर था। इस दौरान 12 समझौते किए गए, जिनमें ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर, AI और ट्रांसपोर्ट शामिल हैं।

न्यूक्लियर ऊर्जा भी सहयोग का नया क्षेत्र बनकर उभरा है। वियतनाम अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को फिर से शुरू करना चाहता है, जिसके लिए उसे भरोसेमंद साझेदार की जरूरत है। इस दिशा में दक्षिण कोरिया और वियतनाम के बीच संयुक्त अध्ययन और फंडिंग से जुड़े समझौते किए गए हैं।

राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने वियतनाम के अन्य शीर्ष नेताओं से भी मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा से दक्षिण कोरिया ने भारत और वियतनाम जैसे देशों के साथ आर्थिक रिश्ते मजबूत करने की दिशा में ठोस आधार तैयार किया है और ग्लोबल साउथ में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का संकेत दिया है।

-(इनपुटःएजेंसी)