राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज रविवार को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित इंदिरापुरम में यशोदा मेडिसिटी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के अच्छे स्वास्थ्य संस्थान स्वस्थ और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में अमूल्य योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और गुणवत्ता सुनिश्चित करना सभी हितधारकों की जिम्मेदारी है, ताकि देश का कोई नागरिक प्रभावी इलाज से वंचित न रहे।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा राष्ट्र निर्माण का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने बताया कि सरकार देशभर में स्वास्थ्य और चिकित्सा ढांचे, संस्थानों और सेवाओं को लगातार सुदृढ़ कर रही है। उन्होंने कहा, “सरकार की ये सभी पहल एक स्वस्थ और विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे रही हैं। लेकिन इसके साथ ही निजी क्षेत्र को भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।”
राष्ट्रपति ने यशोदा अस्पताल के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान इस अस्पताल ने बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज किया। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल ने राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम जैसी सरकारी प्राथमिकताओं को अपनाया है, जो सराहनीय है। राष्ट्रपति ने संस्थान से सिकल सेल एनीमिया से संबंधित राष्ट्रीय अभियानों में भी सक्रिय योगदान देने की अपील की।
उन्होंने अस्पताल के हितधारकों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए अनुसंधान और अन्य संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने की सलाह दी। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि चिकित्सा जिम्मेदारी के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाना भी स्वास्थ्य संस्थानों की प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने यशोदा मेडिसिटी के ‘सभी के लिए सस्ती और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं’ मिशन पर भरोसा जताया और कहा कि इससे न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी स्वास्थ्य क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के उत्कृष्ट स्वास्थ्य संस्थानों के सहयोग से भारत जल्द ही वैश्विक स्वास्थ्य गंतव्य के रूप में और अधिक पहचान हासिल करेगा।-(PIB)


