राष्ट्रपति मुर्मु ने करम पूजा पर दी शुभकामनाएं, प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश

झारखंड के प्रमुख लोक पर्वों में शामिल करम पर्व के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, राज्यपाल संतोष गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कई अन्य नेताओं ने देशवासियों एवं झारखंडवासियों को शुभकामनाएं दीं। प्रकृति की आराधना, अच्छी फसल, भाई-बहन के अटूट प्रेम और सामाजिक एकजुटता से जुड़े इस पर्व को झारखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और जीवन-पद्धति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने दी शुभकामनाएं

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने करम पूजा के अवसर पर देशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, कर्म के प्रति निष्ठा और भाईचारे की भावना से जुड़ा यह पर्व समृद्ध जनजातीय संस्कृति एवं जीवन-मूल्यों की जीवंत अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि करम पर्व प्रकृति के संरक्षण और सद्भाव के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है। राष्ट्रपति ने कामना की कि यह पर्व सभी के जीवन में सुख और समृद्धि लेकर आए।

हेमंत सोरेन ने बताया प्रकृति और संस्कृति का पर्व

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर करम पर्व की शुभकामनाएं देते हुए इसे प्रकृति और मानव जीवन के गहरे जुड़ाव, भाई-बहन के अटूट प्रेम और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि करम पर्व झारखंड की पहचान और जीवन-पद्धति से गहराई से जुड़ा हुआ है।

जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का संदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि करम पर्व प्रकृति के प्रति सम्मान और उसके संरक्षण की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि पूर्वजों ने सिखाया है कि जल, जंगल और जमीन केवल जीवन के आधार नहीं हैं, बल्कि संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों की धरोहर भी हैं।

भाई-बहन के स्नेह का भी पर्व

हेमंत सोरेन ने कहा कि करम पर्व भाई-बहन के पवित्र स्नेह और आपसी विश्वास से भी जुड़ा है। अखड़ा में करम डाली की स्थापना, मांदर की थाप, करम गीत और सामूहिक नृत्य झारखंड की जीवंत लोक-संस्कृति की सुंदर अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिकता की राह पर आगे बढ़ते हुए भी भाषा, संस्कृति और प्रकृति के साथ संबंधों को मजबूत बनाए रखना जरूरी है।

कल्पना सोरेन ने भी दी शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने भी ‘एक्स’ पर करम पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि करम पर्व झारखंड की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और प्रकृति के साथ गहरे रिश्ते का प्रतीक है। भाई-बहन के अटूट प्रेम से लेकर सामाजिक एकजुटता तक यह पर्व लोगों को अपनी माटी और जड़ों से जोड़ता है।

करम डाली और सामूहिक नृत्य की परंपरा

कल्पना सोरेन ने कहा कि अखड़ा में करम डाली की पूजा, मांदर की थाप और सामूहिक नृत्य पुरखों से मिली अनमोल विरासत की पहचान हैं। उन्होंने कहा कि यह पर्व जल, जंगल और जमीन के सम्मान का संदेश भी देता है।

राज्यपाल संतोष गंगवार ने दी बधाई

झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने करमा पूजा के अवसर पर राज्यवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि करमा पूजा प्रकृति, संस्कृति और सामुदायिक एकजुटता का पर्व है। राज्यपाल ने कामना की कि यह पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए।

प्रकृति, भक्ति और समुदाय का उत्सव

केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर करम पर्व की विशेषताओं को साझा किया। मंत्रालय के अनुसार, पवित्र करम पेड़, पारंपरिक गीतों और नृत्य की लय के जरिए यह पर्व प्रकृति, भक्ति और समुदाय के उत्सव को एक साथ जोड़ता है। करम देवता को शक्ति, युवावस्था और जीवन शक्ति से जोड़ा जाता है।

फसल से जुड़ा है करम पर्व

मंत्रालय के अनुसार, करम पर्व भादो महीने के 11वें दिन मनाया जाता है और इसका संबंध फसल से है। पेड़ की पूजा, संगीत और नृत्य इस पर्व की जीवंत परंपराओं का हिस्सा हैं। इसकी सांस्कृतिक जड़ें झारखंड से जुड़ी हैं और यह प्रकृति तथा समुदाय के साथ लोगों के संबंध को अभिव्यक्त करता है। (इनपुट: आईएएनएस)