राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को शिमला में स्थित आर्मी ट्रेनिंग कमांड (एआरटीआरएसी) मुख्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्हें कमान की स्थापना, उसके विकास और भारतीय सेना की परिचालन क्षमता को मजबूत करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
कमान को वरिष्ठ अधिकारियों ने दिया स्वागत और ब्रीफिंग
राष्ट्रपति का स्वागत कविंदर गुप्ता और एआरटीआरएसी के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा ने किया। इसके बाद उन्हें कमान की विभिन्न गतिविधियों और प्रशिक्षण संरचना पर विस्तार से ब्रीफिंग दी गई।
ड्रोन प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकों पर विशेष फोकस
ब्रीफिंग के दौरान एआरटीआरएसी की उन पहलों को रेखांकित किया गया, जिनमें ड्रोन प्रशिक्षण, अत्याधुनिक (निच) तकनीकों को अपनाना, ‘रेड टीमिंग’ की अवधारणा और डिजिटाइजेशन एवं ऑटोमेशन की दिशा में चल रहे प्रयास शामिल हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य सेना को भविष्य की युद्ध चुनौतियों के लिए अधिक सक्षम बनाना है।
आधुनिक युद्ध अवधारणाओं के विकास में अहम भूमिका
द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि एआरटीआरएसी केवल प्रशिक्षण संस्थान नहीं है, बल्कि यह युद्ध की आधुनिक अवधारणाओं को विकसित करने, संसाधन निर्माण और मित्र देशों तथा अन्य सेवाओं के साथ सहयोग बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने इसे सैन्य उत्कृष्टता, आत्मनिर्भरता और विकसित भारत के विजन को आगे बढ़ाने वाला एक प्रमुख स्तंभ बताया।
32 प्रमुख प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से बढ़ रही पेशेवर क्षमता
एआरटीआरएसी के अधीन 32 प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान लगातार भारतीय सेना की पेशेवर क्षमता को मजबूत कर रहे हैं। ये संस्थान आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण प्रदान करते हैं, जिससे सेना की तैयारियों को नई दिशा मिल रही है।
वरिष्ठ अधिकारियों से संवाद और तैयारियों पर जोर
दौरे के दौरान राष्ट्रपति ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत भी की और प्रशिक्षण ढांचे को और मजबूत बनाने पर विचार साझा किए। उन्होंने सभी रैंकों से उच्च स्तर की तैयारी बनाए रखने और समर्पण के साथ कार्य करने का आग्रह किया।


