आयुष मंत्रालय के अधीन केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) की पांचवीं कार्यकारी समिति (ईसी) की बैठक शुक्रवार को आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में अनुसंधान, शिक्षा, वैज्ञानिक लेखन और डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तीन प्रमुख पहलों का शुभारंभ किया गया। इन पहलों का उद्देश्य देश में साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद अनुसंधान तंत्र को और मजबूत करना है।
साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद अनुसंधान का मजबूत स्तंभ बना सीसीआरएएस
बैठक को संबोधित करते हुए आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि सीसीआरएएस साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद अनुसंधान, शिक्षा और जन स्वास्थ्य को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय अनुसंधान प्रणाली को सुदृढ़ बनाने में परिषद के प्रयासों की सराहना करते हुए संगठन को नवाचार और उत्कृष्टता की दिशा में निरंतर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने सीसीआरएएस को 21 एनएबीएच और एनएबीएल मान्यताएं प्राप्त करने, आयुष दीक्षा मंच की स्थापना, अंतरराष्ट्रीय सहयोगी अनुसंधान परियोजनाओं और किशोरियों में एनीमिया पर बड़े पैमाने पर किए गए अध्ययन जैसी उपलब्धियों के लिए बधाई दी।
परिषद की उपलब्धियों पर डाला गया प्रकाश
सीसीआरएएस के महानिदेशक एवं कार्यकारी समिति के सदस्य सचिव प्रो. (वैद्य) रबीनारायण आचार्य ने नवगठित कार्यकारी समिति के अध्यक्ष और सदस्यों का स्वागत किया तथा बैठक का एजेंडा प्रस्तुत किया। उन्होंने परिषद की प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सीसीआरएएस वैश्विक स्तर पर सम्मानित, साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद अनुसंधान इकोसिस्टम विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान, संस्थागत उत्कृष्टता, डिजिटल परिवर्तन, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और क्षमता निर्माण में परिषद की उपलब्धियां आयुर्वेद को वैज्ञानिक आधार पर आगे बढ़ाने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
अनुसंधान पद्धति पर नई पाठ्यपुस्तक जारी
बैठक में ‘आयुर्वेद प्रबोधिनी ग्रंथमाला’ श्रृंखला के तहत अनुसंधान पद्धति पर आधारित नई पाठ्यपुस्तक का विमोचन किया गया। 50 शोध वैज्ञानिकों और संकाय सदस्यों द्वारा तैयार यह पुस्तक राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (एनसीआईएसएम) के स्नातकोत्तर और पीएचडी पाठ्यक्रम के अनुरूप विकसित की गई है। इससे एमडी, एमएस और पीएचडी के विद्यार्थियों में अनुसंधान पद्धति, वैज्ञानिक सोच और साक्ष्य-आधारित शोध क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
वैज्ञानिक लेखन को बढ़ावा देगा ‘सीसीआरएएस प्रयत्न 2026-27’
कार्यकारी समिति ने ‘सीसीआरएएस प्रयत्न 2026-27’ के लिए रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) भी जारी की। इस अवसर पर कार्यक्रम का आधिकारिक पोस्टर भी जारी किया गया। इस पहल का उद्देश्य आयुर्वेद के स्नातकोत्तर और पीएचडी छात्रों में वैज्ञानिक लेखन और शोध प्रकाशन की क्षमता विकसित करना है। संस्था-आधारित कार्यशालाओं के माध्यम से युवा शोधकर्ताओं को वैज्ञानिक संचार के आवश्यक कौशल प्रदान किए जाएंगे।
डिजिटल इकोसिस्टम डैशबोर्ड भी लॉन्च
बैठक में सीसीआरएएस डिजिटल इकोसिस्टम डैशबोर्ड का भी शुभारंभ किया गया। यह परिषद के सभी वेब-आधारित और डिजिटल संसाधनों को एकीकृत रूप से उपलब्ध कराने वाला मंच है। इसे पारदर्शिता, जनसंपर्क, शोध परिणामों के प्रसार और संस्थागत संसाधनों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
कई वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित
बैठक में आयुष मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार हुवेयदा अब्बास, वरिष्ठ सांख्यिकी सलाहकार सत्यजीत पॉल, सलाहकार (आयुर्वेद) डॉ. ए. रघु, राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (एनसीआईएसएम) के पूर्व अध्यक्ष वैद्य जयंत देवपुजारी, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के कुलपति प्रो. (डॉ.) संजीव शर्मा, सीसीआरएएस के उप महानिदेशक डॉ. एन. श्रीकांत, उप निदेशक (प्रशासन) दीपक कोचर तथा कार्यकारी समिति के अन्य सदस्य मौजूद रहे। बैठक में उच्च गुणवत्ता वाले साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा वैज्ञानिक उत्कृष्टता, शैक्षणिक क्षमता निर्माण और डिजिटल नवाचार को एकीकृत करने वाले मजबूत इकोसिस्टम के निर्माण की प्रतिबद्धता दोहराई गई। (इनपुट: पीआईबी)


