प्रतिक्रिया | Saturday, April 05, 2025

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बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने क्षेत्रीय सहयोग के प्रति जताई प्रतिबद्धता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शुक्रवार को थाईलैंड के बैंकॉक में छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। 

‘बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल (बिम्सटेक)’ का शिखर सम्मेलन भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड और भूटान के नेताओं को विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक साथ लाता है।

प्रधानमंत्री मोदी, नेपाली प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली, भूटानी प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे, श्रीलंकाई प्रधानमंत्री हरिनी अमरसूर्या, बांग्लादेशी अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस और म्यांमार के सैन्य नेता वरिष्ठ जनरल मिन आंग हलिंग का थाईलैंड के प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न शिनवात्रा ने आगमन पर स्वागत किया।

पीएम मोदी ने एक्स पर किया पोस्ट प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, “थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित शिखर सम्मेलन में साथी बिम्सटेक नेताओं के साथ। हम विविध क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं। हमारी कोशिशों से लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए, ऐसी कामना करता हूं।”

इससे एक दिन पहले पीएम मोदी ने भूकंप के बाद भारत के समर्थन पर चर्चा की

इससे पहले दिन में, प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार की सैन्य नेतृत्व वाली सरकार के प्रमुख वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप के बाद द्विपक्षीय संबंधों और भारत के समर्थन पर चर्चा की।

भारत इस सहायता के लिए कर रहा हर संभव प्रयास 

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, “बैंकॉक में बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान म्यांमार के वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग से मुलाकात की। एक बार फिर, हाल ही में आए भूकंप के मद्देनजर जान-माल के नुकसान पर संवेदना व्यक्त की। भारत इस कठिन समय में म्यांमार के अपने बहनों और भाइयों की सहायता के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।”

7.7 तीव्रता वाले भूकंप के बाद भारत ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के तहत पहुंचा रहा मानवीय सहायता

म्यांमार में आए 7.7 तीव्रता वाले भूकंप के बाद भारत ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के तहत मानवीय सहायता पहुंचा रहा है। भूकंप में 3,000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। 

इससे पहले पीएम मोदी और थाई पीएम की हुई थी मुलाकात 

ज्ञात हो, इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी कल गुरुवार को थाईलैंड की दो दिवसीय यात्रा पर बैंकॉक पहुंचे। उन्होंने अपने थाई समकक्ष, पैतोंगटार्न शिनावात्रा के साथ द्विपक्षीय वार्ता की।

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने भारत और थाईलैंड के बीच द्विपक्षीय सहयोग की पूरी श्रृंखला की समीक्षा की। उन्होंने राजनीतिक आदान-प्रदान, रक्षा और सुरक्षा साझेदारी, रणनीतिक जुड़ाव, व्यापार और निवेश तथा लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, स्टार्ट-अप, नवाचार, डिजिटल, शिक्षा, संस्कृति और पर्यटन सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

दोनों नेताओं ने मानव तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी और साइबर घोटाले सहित अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराधों का मुकाबला करने के लिए सहयोग को गहरा करने के तरीकों पर भी चर्चा की। 

वैश्विक मुद्दों पर विचारों का किया आदान-प्रदान 

दोनों प्रधानमंत्रियों ने वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया और बिम्सटेक, आसियान और मेकांग गंगा सहयोग सहित उप-क्षेत्रीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों में घनिष्ठ सहयोग बनाने के तरीकों पर चर्चा की।

पीएम मोदी और थाईलैंड की पीएम शिनावात्रा ने भारत-थाईलैंड रणनीतिक साझेदारी की स्थापना पर संयुक्त घोषणापत्र के आदान-प्रदान को देखा। उन्होंने हथकरघा और हस्तशिल्प, डिजिटल प्रौद्योगिकी, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम और समुद्री विरासत के क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों के आदान-प्रदान को भी देखा। दोनों नेताओं ने भारत-थाईलैंड कांसुलर वार्ता की स्थापना का भी किया स्वागतदोनों नेताओं ने भारत-थाईलैंड कांसुलर वार्ता की स्थापना का भी स्वागत किया, जो दोनों देशों के बीच लोगों के बीच संपर्क को और सुविधाजनक बनाएगा।

बताना चाहेंगे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के बाद, प्रधानमंत्री मोदी अपने दो देशों के दौरे के दूसरे चरण के लिए आज बाद में श्रीलंका की यात्रा करेंगे। तीन दिवसीय राजकीय यात्रा के दौरान, पीएम मोदी राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इससे पहले, राष्ट्रपति दिसानायके ने पदभार ग्रहण करने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के रूप में भारत की राजकीय यात्रा की थी। वहीं दूसरी ओर यह प्रधानमंत्री मोदी की अपने कार्यकाल के दौरान श्रीलंका की चौथी यात्रा होगी। भारत-श्रीलंका संबंध इतिहास, धर्म, संस्कृति और मजबूत लोगों के बीच साझा संबंधों पर आधारित गहरे सभ्यतागत संबंधों में निहित हैं। श्रीलंका भारत की पड़ोसी प्रथम नीति का एक अभिन्न अंग है और यह संबंध समय की कसौटी पर खरा उतरा है। (इनपुट-एजेंसी)

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आखरी अपडेट: 4th Apr 2025