केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) की तीसरी मिशन संचालन समूह बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में देश के डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे की प्रगति की समीक्षा की गई और इसे और मजबूत बनाने की भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई।
बैठक को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि डिजिटल तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर, आसान और सभी के लिए सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और सहमति आधारित डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड नागरि कों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद करेंगे।
बैठक में बताया गया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम में से एक बन गया है। इसके तहत अब तक 93.95 करोड़ से अधिक ABHA नंबर बनाए जा चुके हैं और 105 करोड़ स्वास्थ्य रिकॉर्ड जोड़े गए हैं।
इसके अलावा राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य रजिस्ट्रियों में 5.33 लाख स्वास्थ्य सुविधाएं और 9.85 लाख स्वास्थ्य पेशेवर पंजीकृत किए गए हैं। मिशन के तहत 2.72 लाख स्वास्थ्य केंद्रों ने ABDM आधारित सॉफ्टवेयर अपनाया है, जबकि तेज ओपीडी पंजीकरण के लिए करीब 24 करोड़ स्कैन एंड रजिस्टर टोकन जारी किए गए हैं।
बैठक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ABDM के विस्तार, मॉडल जिलों, मॉडल स्वास्थ्य सुविधाओं और आरोग्य सेतु 2.0 जैसी पहलों की भी समीक्षा की गई। इसके साथ ही आयुष्मान भारत PM-JAY, CGHS, ESIC और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के साथ डिजिटल एकीकरण पर चर्चा हुई।
जेपी नड्डा ने कहा कि ABDM के तहत मजबूत डिजिटल स्वास्थ्य ढांचा तैयार किया गया है और अब अगले चरण में इसके ज्यादा से ज्यादा उपयोग और विस्तार पर ध्यान देना होगा।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत बनाना जरूरी है और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन इस दिशा में एक अहम आधार बनेगा।
केंद्र, राज्यों और सभी हितधारकों के सहयोग से भारत एक सुरक्षित, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
(इनपुटः पीआईबी)


