आईएएस में महिलाओं की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 41% पहुंची : डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 2024 बैच में महिला अधिकारियों का प्रतिनिधित्व लगभग 41% तक पहुंच गया है, जो भारत की सिविल सेवाओं के बदलते स्वरूप और अवसरों के लोकतंत्रीकरण को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आईएएस के इतिहास में यह महिला-पुरुष भागीदारी के सबसे बड़े अनुपातों में से एक है और यह संकेत देता है कि अवसर अब पारंपरिक सामाजिक और क्षेत्रीय सीमाओं से आगे बढ़ रहे हैं।

नई दिल्ली स्थित सिविल सर्विसेज ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट (सीएसओआई) में 2024 बैच के आईएएस अधिकारी प्रशिक्षुओं से बातचीत करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज सेवा में प्रवेश करने वाले अधिकारी इतिहास के एक महत्वपूर्ण दौर का हिस्सा हैं, क्योंकि जब भारत वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब यही अधिकारी अपने करियर के शीर्ष नेतृत्व पदों पर होंगे। उन्होंने कहा कि भारत के भविष्य के शासन की दिशा काफी हद तक इसी पीढ़ी के सिविल सेवकों द्वारा तय की जाएगी।

सहायक सचिव कार्यक्रम के तहत अधिकारियों को मिल रहा अनुभव

यह संवाद सहायक सचिव पाठ्यक्रम के तहत आयोजित किया गया। इसके अंतर्गत 2024 बैच के 184 आईएएस अधिकारियों को 4 मई से 25 जून, 2026 तक आठ सप्ताह के लिए केंद्र सरकार के 49 मंत्रालयों और विभागों से जोड़ा गया है, ताकि उन्हें नीति निर्माण, प्रशासनिक समन्वय और सरकारी कामकाज का प्रत्यक्ष अनुभव मिल सके। कार्यक्रम में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की संयुक्त सचिव छवि भारद्वाज, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) की संयुक्त निदेशक शनमुगा प्रिया मिश्रा और उप निदेशक क्रांति कुमार पति भी उपस्थित रहे।

अधिक आत्मविश्वासी और नीति-उन्मुख अधिकारी तैयार कर रहा कार्यक्रम

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किया गया सहायक सचिव कार्यक्रम युवा आईएएस अधिकारियों के शुरुआती प्रशासनिक अनुभव को पूरी तरह बदल रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में इस पहल ने ऐसे अधिकारियों की नई पीढ़ी तैयार की है, जो सेवा की शुरुआत से ही अधिक आत्मविश्वासी, नीति-उन्मुख और संस्थागत रूप से बेहतर जुड़ी हुई है।

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी सामाजिक बदलाव का संकेत

उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं, उच्च शिक्षा और पेशेवर क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी यह दिखाती है कि अवसरों और पहुंच का तेजी से लोकतंत्रीकरण हो रहा है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह बदलाव भारत में व्यापक सामाजिक परिवर्तन का भी प्रतिबिंब है।

बदल रहा है सिविल सेवा चयन का क्षेत्रीय स्वरूप

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जिन राज्यों का प्रतिनिधित्व पहले सीमित था, वहां से अब बड़ी संख्या में उम्मीदवार सफल हो रहे हैं। वहीं, पारंपरिक रूप से प्रभावशाली क्षेत्रों के युवाओं की करियर प्राथमिकताएं अब उभरते क्षेत्रों और वैश्विक अवसरों की ओर बढ़ रही हैं। उन्होंने इसे अधिक महत्वाकांक्षी और गतिशील भारत के उदय का संकेत बताया।

तकनीकी समझ और बहुविषयक सोच की बढ़ी जरूरत

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि वर्तमान बैच के 78 अधिकारी इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से हैं, जबकि चिकित्सा, कानून, प्रबंधन और मानविकी जैसे क्षेत्रों के पेशेवर भी इसमें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में सरकारी कार्यक्रम अधिक डेटा आधारित, डिजिटल और नवाचार-केंद्रित हो रहे हैं, इसलिए शासन व्यवस्था में तकनीकी समझ और बहुविषयक सोच की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।

आधुनिक प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

प्रशिक्षु अधिकारियों से अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने कहा कि आधुनिक शासन व्यवस्था अब कठोर पदानुक्रम और एकतरफा संवाद पर आधारित नहीं रह गई है। उन्होंने अधिकारियों को खुले विचारों वाला शिक्षार्थी बने रहने की सलाह देते हुए कहा कि बदलते समय में अनुकूलन क्षमता और नई परिस्थितियों के अनुरूप खुद को विकसित करना सबसे महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक भागीदारी पर अधिक जोर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “अधिकतम शासन, न्यूनतम सरकार” के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी का उपयोग केवल कार्यकुशलता के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों और संस्थानों के बीच भरोसा मजबूत करने के लिए भी होना चाहिए।

मिशन कर्मयोगी और डिजिटल कौशल पर दिया जोर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने अधिकारियों से मिशन कर्मयोगी जैसे प्लेटफॉर्म का पूरा उपयोग करने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल गवर्नेंस, डेटा विश्लेषण तथा सार्वजनिक संवाद जैसे उभरते क्षेत्रों में अपनी क्षमताएं लगातार बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भविष्य के प्रशासकों से तकनीकी दक्षता के साथ-साथ सहानुभूति, संवेदनशीलता और नैतिक सार्वजनिक आचरण की भी अपेक्षा की जाएगी।

भारत@2047 को बताया राष्ट्रीय मिशन

उन्होंने कहा कि भारत@2047 केवल एक मील का पत्थर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मिशन है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने युवा अधिकारियों से विनम्रता, अनुशासन और राष्ट्रीय उद्देश्य की भावना के साथ लोक सेवा करने का आह्वान किया और कहा कि आने वाले दशकों में यही अधिकारी भारत के उत्थान के प्रमुख वाहक बनेंगे। (इनपुट: पीआईबी)