ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने मंगलवार को डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के कार्यान्वयन की समीक्षा की और आवंटित लक्ष्यों के अनुरूप प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया। संचार भवन में हुई समीक्षा बैठक में योजना की प्रगति के साथ-साथ डिजिटल सुधारों और नागरिक-केंद्रित सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों पर भी चर्चा हुई।
ग्रामीण युवाओं को कौशल और रोजगार से जोड़ने की पहल
दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई), दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाय-एनआरएलएम) के तहत संचालित प्रमुख पहलों में शामिल है। इसका उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना और प्लेसमेंट से जुड़े कौशल कार्यक्रमों के जरिए उनके लिए सतत आजीविका के अवसर तैयार करना है। योजना व्यापक रूप से आजीविका के विविधीकरण और गरीबी उन्मूलन के प्रयासों से जुड़ी है।
18.45 लाख ग्रामीण युवाओं को मिला प्रशिक्षण
सरकार के अनुसार, 2014-15 में योजना की शुरुआत से अब तक कुल 18.45 लाख ग्रामीण गरीबों को प्रशिक्षित किया गया है। इनमें से 12.35 लाख युवाओं को अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में वेतनयुक्त रोजगार प्रदान किया गया है। योजना का कार्यान्वयन राज्य सरकारों के माध्यम से परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों (पीआईए) द्वारा किया जाता है।
2025 में दिशा-निर्देशों में संशोधन
कार्यक्रम को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए वर्ष 2025 में डीडीयू-जीकेवाई के दिशा-निर्देशों में संशोधन किया गया। इसके तहत योजना के कार्यान्वयन और निगरानी व्यवस्था को अधिक सक्षम बनाने पर जोर दिया गया है। डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के लिए एंड-टू-एंड डिजिटल समाधान भी विकसित किया गया है, जो प्रशिक्षण से लेकर प्लेसमेंट तक विभिन्न चरणों को सुगम बनाने में मदद करेगा।
समय पर प्रशिक्षण बैच शुरू करने पर जोर
समीक्षा बैठक में स्वीकृत परियोजनाओं के तेजी से कार्यान्वयन के लिए प्रशिक्षण बैचों को समय पर शुरू करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। राज्य मंत्री ने कहा कि डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप प्रशिक्षण और प्लेसमेंट को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए सभी संभव उपाय किए जाने चाहिए।
रियल-टाइम निगरानी के लिए उन्नत डैशबोर्ड
कार्यक्रम के प्रदर्शन की विस्तृत और सूक्ष्म निगरानी के लिए उन्नत डैशबोर्ड और एनालिटिकल रिपोर्ट विकसित करने पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के कार्यान्वयन की रियल-टाइम निगरानी को मजबूत करना और विभिन्न स्तरों पर प्रदर्शन की स्थिति का बेहतर आकलन करना है।
उम्मीदवार पंजीकरण पोर्टल से बढ़ेगी पारदर्शिता
ग्रामीण युवाओं के लिए सार्वजनिक उम्मीदवार पंजीकरण पोर्टल विकसित करने की पहल पर भी चर्चा हुई। इसके जरिए युवा अपनी रुचि ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे, उपलब्ध प्रशिक्षण अवसरों की जानकारी हासिल कर सकेंगे और परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों (पीआईए) की प्रदर्शन रेटिंग देख सकेंगे। इससे युवाओं को सूचित विकल्प चुनने में मदद मिलने के साथ योजना में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
परियोजना मूल्यांकन और मंजूरी प्रक्रिया में तेजी
परियोजनाओं के मूल्यांकन में तेजी लाने और मंजूरी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अतिरिक्त मूल्यांकन एजेंसियों को पैनल में शामिल करने की संभावना पर भी विचार किया गया। इसका उद्देश्य परियोजनाओं के मूल्यांकन और स्वीकृति की प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाना है, ताकि स्वीकृत परियोजनाओं का कार्यान्वयन समय पर शुरू हो सके।
तकनीक आधारित सुधारों से मजबूत होगा क्रियान्वयन
बैठक में स्वचालित पीआरएन जनरेशन, ऑनलाइन शिकायत निवारण, ब्लॉकचेन आधारित प्रमाणपत्र सत्यापन और रियल-टाइम मूल्यांकन डैशबोर्ड जैसे तकनीक आधारित सुधारों पर चर्चा हुई। इन पहलों का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ योजना के कार्यान्वयन और सेवा वितरण को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है।
फेस ऑथेंटिकेशन और एसआईडीएच एकीकरण पर जोर
नागरिक सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए एकीकृत ऑनलाइन शिकायत निवारण तंत्र, रियल-टाइम मूल्यांकन डैशबोर्ड और वास्तविक मामलों में फेस ऑथेंटिकेशन आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया। पात्र उम्मीदवारों के लिए दोबारा नामांकन का प्रावधान और पाठ्यक्रम विवरण के स्वचालित सत्यापन के लिए स्किल इंडिया डिजिटल हब (एसआईडीएच) के साथ एकीकरण भी प्रस्तावित सुधारों का हिस्सा है।
वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
समीक्षा बैठक में संयुक्त सचिव (ग्रामीण कौशल-II) सुश्री एम.जी. जयश्री, निदेशक (कौशल) श्री संतोष के. तिवारी, उप निदेशक एनआईसी सुश्री दीपिका अग्रवाल समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में डीडीयू-जीकेवाई 2.0 को अधिक पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और परिणाम-केंद्रित बनाने के लिए विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। (इनपुट: पीआईबी)


