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AI आधारित साइबर हमलों से बढ़ा खतरा, वित्तीय संस्थानों को विशेषज्ञों की चेतावनी

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के तेजी से बढ़ते उपयोग के बीच बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा (BFSI) और डिजिटल भुगतान क्षेत्र के लिए साइबर सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI के कारण साइबर हमले पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सटीक और जटिल हो गए हैं, जिससे वित्तीय संस्थानों के सामने नए प्रकार के जोखिम पैदा हो रहे हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In), कंप्यूटर सिक्योरिटी इंसिडेंट रिस्पांस टीम-फाइनेंस (CSIRT-Fin) और साइबर सुरक्षा कंपनी SISA ने सोमवार को बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा और डिजिटल भुगतान क्षेत्र के लिए ‘डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025-26’ का दूसरा संस्करण जारी किया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि AI Asymmetry वित्तीय संस्थानों के सामने उभरते सबसे बड़े खतरों में से एक है। जिन साइबर गतिविधियों को पहले विशेषज्ञों की बड़ी टीम और कई सप्ताह का समय लगता था, उन्हें अब सीमित संसाधनों वाले हमलावर भी AI की मदद से बेहद कम समय में अंजाम दे सकते हैं। इससे हमलावरों की क्षमता सुरक्षा तंत्र और नियामक व्यवस्थाओं की तुलना में कहीं तेजी से विकसित हो रही है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि साइबर खतरे लगातार अधिक जटिल होते जा रहे हैं। ऐसे में डिजिटल विश्वास को मजबूत करने के लिए सरकारी संस्थानों और उद्योग जगत के बीच भरोसेमंद साझेदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि CERT-In, CSIRT-Fin और SISA का यह संयुक्त प्रयास भारत की साइबर सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने के साथ वैश्विक स्तर पर भी योगदान देगा।

रिपोर्ट डिजिटल फोरेंसिक, साइबर हमलों की जांच, CERT-In और CSIRT-Fin के विश्लेषण तथा AI आधारित खतरों पर किए गए शोध पर आधारित है। इसमें यह भी बताया गया है कि पिछले संस्करण में किए गए सात प्रमुख पूर्वानुमानों में से छह अब पूरी तरह वास्तविकता बन चुके हैं। इससे स्पष्ट होता है कि किसी नए साइबर खतरे के सामने आने और उसके दुरुपयोग के बीच का समय अब वर्षों से घटकर कुछ महीनों या कई मामलों में कुछ सप्ताह तक रह गया है।

SISA के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी दर्शन शांतमूर्ति ने कहा कि नवाचार और उसके दुरुपयोग के बीच की दूरी तेजी से कम हुई है। यही बदलाव वित्तीय क्षेत्र की साइबर सुरक्षा रणनीतियों को पूरी तरह बदलने की मांग करता है।

रिपोर्ट में वित्तीय संस्थानों, नियामकों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को बैंकिंग, बीमा और डिजिटल भुगतान प्रणाली को प्रभावित करने वाले उभरते खतरों का आकलन भी उपलब्ध कराया गया है।

CERT-In के महानिदेशक डॉ. संजय बहल ने कहा कि भारत का वित्तीय तंत्र लगातार अधिक डिजिटल, आपस में जुड़ा और रीयल-टाइम आधारित होता जा रहा है। ऐसे में साइबर सुरक्षा केवल किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी संस्थानों, नियामकों और डिजिटल आपूर्ति श्रृंखला की साझा जिम्मेदारी है।

(इनपुटः एजेंसी)