असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सरकारी नौकरियों में चयनित उम्मीदवारों की पुलिस जांच प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य चयन और नौकरी ज्वाइन करने के बीच होने वाली देरी को कम करना है।
मुख्यमंत्री ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बताया कि अब पुलिस सत्यापन के कारण चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति नहीं रोकी जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे चयन से लेकर सरकारी सेवा में शामिल होने की प्रक्रिया सरल और तेज होगी।
नए नियम के तहत उम्मीदवार के चरित्र, पूर्व रिकॉर्ड, नागरिकता और दस्तावेजों की वास्तविकता से जुड़ी पुलिस जांच अधिकतम छह महीने में पूरी करनी होगी।
यदि छह महीने की तय अवधि में पुलिस सत्यापन पूरा नहीं होता है, तो उम्मीदवार के रिकॉर्ड को सत्यापित मान लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पुलिस जांच लंबित रहने के बावजूद उम्मीदवार नोटरी से प्रमाणित शपथपत्र जमा करके सरकारी सेवा में शामिल हो सकेंगे।
हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि अब पुलिस सत्यापन नियुक्ति में बाधा नहीं बनेगा। सरकार का यह फैसला उन उम्मीदवारों के लिए राहत लेकर आएगा, जिन्होंने भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली है, लेकिन पुलिस जांच लंबित होने के कारण नियुक्ति या कार्यभार संभालने का इंतजार कर रहे हैं।
पुलिस सत्यापन का उद्देश्य सामान्य तौर पर उम्मीदवार के चरित्र और पूर्व रिकॉर्ड की जांच करने के साथ-साथ उसकी नागरिकता तथा भर्ती के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों की वास्तविकता की पुष्टि करना होता है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया बंद नहीं होगी, बल्कि यह जारी रहेगी। हालांकि, छह महीने से अधिक समय तक सत्यापन लंबित रहने की स्थिति में उम्मीदवार को सरकारी सेवा में शामिल होने से नहीं रोका जाएगा।
असम सरकार पिछले कुछ वर्षों में सरकारी भर्ती और नियुक्ति प्रक्रिया को तेज करने पर जोर देती रही है। राज्य के विभिन्न विभागों में बड़े स्तर पर भर्ती अभियान भी चलाए गए हैं।
सरकार के इस फैसले से उन सफल उम्मीदवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद पुलिस सत्यापन लंबित होने के कारण नियुक्ति या कार्यभार संभालने का इंतजार कर रहे थे।
(इनपुट-IANS)


