रूसी राजदूत ने INNOPROM.India का किया स्वागत, भारत-रूस व्यापार को बताया नई ऊंचाई पर

रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने नई दिल्ली में पहली बार आयोजित हो रहे ‘INNOPROM.India’ इंडस्ट्रियल फेयर का स्वागत करते हुए इसे भारत-रूस आर्थिक संबंधों को अभूतपूर्व बढ़ावा देने वाला बताया है। भारत मंडपम में 9 से 11 सितंबर तक चलने वाले इस आयोजन को दोनों देशों के औद्योगिक और तकनीकी सहयोग का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

राजदूत का संदेश: इतिहास का सबसे बड़ा औद्योगिक आयोजन

रूसी दूतावास और फाइनेंशियल एक्सप्रेस द्वारा संयुक्त रूप से तैयार पत्रिका “INNOPROM.India और 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026” में प्रकाशित अपने संदेश में राजदूत अलीपोव ने कहा, “मुझे INNOPROM.India में आपका स्वागत करते हुए बहुत खुशी हो रही है। यह रूस के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय इंडस्ट्रियल फेयर का पहला भारतीय संस्करण है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि इतने बड़े पैमाने और दायरे का औद्योगिक आयोजन रूस-भारत आर्थिक संबंधों के इतिहास में अभूतपूर्व है। यह प्रदर्शनी रूसी संघ के उद्योग और व्यापार मंत्रालय तथा भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में हो रही है। इसमें दोनों देशों की 200 से अधिक कंपनियां और व्यावसायिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

प्रमुख कंपनियों और मंत्रियों की भागीदारी

रूसी प्रतिनिधिमंडल में रोस्टेक, रोसाटॉम, रोस्कोस्मोस, रुसल, ट्रांसमैशहोल्डिंग, फोसएग्रो, रूसी निर्यात केंद्र और स्बेर जैसी दिग्गज कंपनियों के सीईओ शामिल हैं। मॉस्को, क्रास्नोडार, तातारस्तान और चेल्याबिंस्क के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद हैं। भारतीय पक्ष में इस्पात मंत्रालय का ‘नेशनल स्टील पवेलियन’ मुख्य आकर्षण है, जिसमें सेल, एनएमडीसी, एमओआईएल और मेकॉन शामिल हैं। इसके अलावा काबिल, वेदांता, आईटीसी और आंध्र प्रदेश की विशेष प्रस्तुति भी प्रदर्शनी का हिस्सा है। प्लेनरी सत्र में रूसी उद्योग और व्यापार मंत्री एंटोन अलीखानोव तथा भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के शामिल होने की उम्मीद है।

स्थानीयकरण, संयुक्त उद्यम और नई तकनीक पर फोकस

राजदूत ने बताया कि व्यापक बिजनेस प्रोग्राम औद्योगिक प्राथमिकताओं, स्थानीयकरण, संयुक्त उद्यमों और द्विपक्षीय व्यापार के व्यावहारिक तंत्रों पर केंद्रित होगा। इनमें राष्ट्रीय मुद्राओं में सीमा-पार भुगतान, सीमा शुल्क प्रक्रियाएं और परिवहन कॉरिडोर शामिल हैं। एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, रीजनल एविएशन, कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और मानकों पर भी चर्चा होगी। कार्यक्रम को व्यावहारिक नतीजों के लिए डिजाइन किया गया है, जहां बी2बी और बी2जी फॉर्मेट ठोस परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का मंच प्रदान करेंगे।

व्यापार सात गुना बढ़ा, 2030 तक 100 अरब डॉलर का लक्ष्य

अलीपोव ने कहा कि यह आयोजन भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और रूस की ‘तकनीकी संप्रभुता’ नीतियों को एक-दूसरे का पूरक बनाता है। पिछले पांच वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग सात गुना बढ़कर 2025 में 63 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है। 2030 तक इसे 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। राजदूत ने सभी को आमंत्रित करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम रूस-भारत की ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ को अगले दशक में मजबूत आधार प्रदान करेगा। (इनपुट-एजेंसी)