भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा होगी मजबूत, जमीन उपलब्ध कराने पर बीएसएफ डीजी ने सरकार का जताया आभार

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक (डीजी) प्रवीण कुमार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए जमीन उपलब्ध कराने पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और राज्य सरकार को धन्यवाद दिया है। गुरुवार को जारी बयान में कहा गया, “बीएसफ डीजी ने बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जमीन देने पर मुख्यमंत्री और राज्य सरकार का आभार जताया। इससे बॉर्डर सिक्योरिटी ग्रिड को मजबूत करने और सीमा पर बाड़ लगाने में रह गई कमियों को दूर करने में मदद मिलेगी।”

डीजी कुमार ने 14 अक्टूबर को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की और उन्हें भारत-बांग्लादेश सीमा पर मौजूदा सुरक्षा हालात के बारे में जानकारी दी। भारत और बांग्लादेश के बीच 4,096.7 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसमें से 2,216.7 किलोमीटर का हिस्सा पश्चिम बंगाल में पड़ता है। राज्य में यह सीमा दक्षिण में सुंदरबन से लेकर उत्तर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर तक फैली हुई है।

बैठक के दौरान डीजी कुमार ने मुख्यमंत्री को पश्चिम बंगाल में बीएसएफ की तैयारियों और सीमा के उन हिस्सों को सुरक्षित करने के लिए अपनाई जा रही रणनीतियों के बारे में जानकारी दी, जहां अभी तक बाड़ नहीं लगाई गई है। गृह मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा का लगभग 569 किलोमीटर हिस्सा बिना बाड़ वाला है। इसमें से लगभग 113 किलोमीटर का हिस्सा नदी वाला क्षेत्र है, जहां पारंपरिक तरीके से बाड़ लगाना संभव नहीं है।

बांग्लादेश से सटी सीमा वाले अन्य राज्यों के विपरीत पश्चिम बंगाल में बीएसएफ दो फ्रंटियर दक्षिण बंगाल फ्रंटियर और उत्तर बंगाल फ्रंटियर के जरिए काम करती है। सत्ता में आने के बाद सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने सीमा पर बाड़ लगाने और बॉर्डर आउटपोस्ट (बीओपी) के निर्माण के लिए बीएसएफ को जमीन सौंपना शुरू कर दिया। नौ जिलों में लगभग 1,024 एकड़ जमीन इस बल को सौंपने के लिए मंजूर कर ली गई है।

राज्य सरकार का कहना है कि पिछली सरकार के समय हुई देरी की वजह से सीमा से जुड़े महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के विकास का काम रुक गया था। एक सूत्र ने बताया, “बैठक में सीमा पर अवैध घुसपैठ और अन्य अपराधों को रोकने के लिए सभी सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल पर चर्चा हुई। इसके अलावा, जीरो-लाइन पर बसे गांवों को दूसरी जगह बसाने की जरूरत पर भी बात हुई।” ‘जीरो-लाइन’ गांव वे बस्तियां हैं जो अंतरराष्ट्रीय सीमा से 150 गज के दायरे में स्थित हैं। इनमें से कई गांव सीमा पर लगी बाड़ के उस पार हैं, जबकि कुछ इलाकों में इनकी मौजूदगी की वजह से बाड़ लगाना मुश्किल हो गया है।

पश्चिम बंगाल में लगभग 360 ‘जीरो-लाइन’ गांव हैं, जिनकी कुल आबादी करीब 70,000 है। इनकी स्थिति के कारण बीएसएफ को कामकाज में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, इसलिए बीएसएफ ने इन्हें दूसरी जगह बसाने (रीलोकेशन) की मांग की है। सीएम अधिकारी ने बीएसएफ के महानिदेशक (डीजी) को भरोसा दिलाया कि इस मुद्दे को सुलझाने में राज्य सरकार पूरा सहयोग देगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार बीएसएफ जवानों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए हर जरूरी मदद मुहैया कराएगी।(इनपुट-आईएएनएस)

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