अमेरिका बुधवार तक इराक में अपने आखिरी सैन्य ठिकानों से सैनिकों की वापसी पूरी करने की तैयारी में है।
अमेरिकी सैनिकों की वापसी का समझौता 2024 में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में हुआ था और इसे डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन आगे बढ़ा रहा है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल है। अमेरिकी सेना के इराक से हटने से वहां सुरक्षा और राजनीतिक प्रभाव को लेकर नई स्थिति बन सकती है।
अमेरिका ने 2003 में इराक पर हमला कर तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन की सरकार को सत्ता से हटाया था। इसके बाद अमेरिकी सेना ने देश में लंबे समय तक अभियान चलाया और 2011 के अंत में इराक से वापस चली गई। करीब तीन साल बाद अमेरिकी सैनिक फिर इराक लौटे और 2014 से 2017 के बीच इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ाई में इराकी सुरक्षा बलों की मदद की।
इराक हाल के वर्षों में ऐसा देश रहा है जिसके अमेरिका और ईरान दोनों के साथ करीबी राजनीतिक और सैन्य संबंध रहे हैं। कई बार इराक की जमीन दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष संघर्ष का क्षेत्र भी बनी। 2020 में अमेरिका ने बगदाद हवाई अड्डे के पास ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी को एक हमले में मार दिया था। इसके बाद ईरान समर्थित गुटों ने इराक में अमेरिकी ठिकानों पर कई हमले किए।
ईरान ने अमेरिकी सैनिकों की इराक से वापसी का स्वागत किया है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के उपाध्यक्ष अमीर हयात मोकद्दम ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों के इराक और पूरे क्षेत्र से जाने के बाद वहां स्थायी सुरक्षा कायम हो सकती है। ईरान के अनुसार, उसका लक्ष्य पूरे मध्य पूर्व से अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को खत्म करना है।
-(इनपुटः Reuters)


