झारखंड आंदोलन के नायक और राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन के निधन पर झारखंड के राज्यपाल सहित कई प्रमुख लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी का निधन अत्यंत दुखद व पीड़ादायक है।
राजनीतिक-सामाजिक जगत में उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा
अपने शोक संदेश में राज्यपाल ने कहा कि वे जनजातीय अस्मिता व अधिकार के सशक्त स्वर थे। राजनीतिक-सामाजिक जगत में उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा। शिबू सोरेन की बहू और गांडेय विधानसभा सीट की विधायक कल्पना सोरेन ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘सब वीरान सा हो गया है… अंतिम जोहार आदरणीय बाबा… आपका संघर्ष, आपका स्नेह, आपका दृढ़ विश्वास – आपकी यह बेटी कभी नहीं भूलेगी।’
मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने सोशल मीडिया पर लिखा
झारखंड आंदोलन के दौरान शिबू सोरेन के अनन्य साथी रहे पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने सोशल मीडिया पर लिखा, “दिशोम गुरू आदरणीय शिबू सोरेन जी के निधन की दुखद सूचना से शोकाकुल हूं। मरांग बुरु दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें। यह एक युग का अंत है। झारखंड आंदोलन के दौरान पहाड़ों, जंगलों एवं सुदूरवर्ती गांवों से लेकर विधानसभा तक, आपके साथ बिताये पल याद आ रहे हैं।”
आप हमेशा हमारे दिल में रहेंगे
चंपई सोरेन ने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए आगे लिखा, “गुरुजी, महाजनी प्रथा एवं नशे के खिलाफ आदिवासियों, मूलवासियों तथा शोषित-पीड़ित जनता के संघर्ष को जिस प्रकार आपने दिशा दी, उसे आने वाली पीढ़ियां सदैव याद रखेंगी। आप हमेशा हमारे दिल में रहेंगे। आपके आदर्श एवं विचार सदैव हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे। झारखंड की आम जनता के हितों को लेकर जो संघर्ष आपने शुरू किया था, वह जीवनपर्यंत जारी रहेगा।”
दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जाना झारखंड की अपूरणीय क्षति
वहीं, राजमहल के झामुमो सांसद विजय कुमार हांसदा ने कहा कि वटवृक्ष के रूप में हम सबको स्नेह, आशीर्वाद और मार्गदर्शन देने वाले अभिभावक दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जाना झारखंड की अपूरणीय क्षति है।
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अपने झारखंड का सूरज सोमवार की सुबह उगने से पहले ही हमेशा के लिए अस्त हो गया। गुरुजी ने न सिर्फ झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाया, बल्कि आदिवासी समाज को अंधकार से निकालकर अधिकार और आत्मसम्मान के उजाले की ओर अग्रसर किया। वे हमारे लिए पिता तुल्य थे। उनका यूं अचानक चले जाना, न सिर्फ झारखंड बल्कि पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति है।” (इनपुट-आईएएनएस)


