साइलेंट किलर सिकल सेल रोग: रोकथाम और समय पर जांच ही बचाव

सिकल सेल रोग एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य गोल आकार के बजाय हंसिये (सिकल) जैसी आकृति धारण कर लेती हैं।

विशेषज्ञ डॉ. नितिन अग्रवाल, एमडी (ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन) के अनुसार, ये असामान्य कोशिकाएं रक्त वाहिकाओं में फंस जाती हैं, जिससे शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो जाती है। इसके कारण मरीजों को असहनीय दर्द, बार-बार संक्रमण, गंभीर एनीमिया और समय के साथ गुर्दे, आंखों तथा हृदय जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान हो सकता है।

भारत में बड़ी संख्या में लोग सिकल सेल रोग (Sickle Cell Disease) से प्रभावित हैं।

बचाव का सबसे प्रभावी उपाय

विशेषज्ञों के अनुसार, विवाह से पहले हीमोग्लोबिन इलेक्ट्रोफोरेसिस जांच कराना सिकल सेल रोग की रोकथाम का सबसे प्रभावी तरीका है। यदि दोनों जीवनसाथी सिकल सेल के वाहक (Carrier) हों, तो प्रत्येक गर्भावस्था में बच्चे को यह बीमारी होने की संभावना 25 प्रतिशत तक रहती है।

इलाज और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट

सिकल सेल रोग के प्रबंधन में हाइड्रोक्सीयूरिया दवा दर्द के दौरे और जटिलताओं को कम करने में मदद करती है। हालांकि, इस बीमारी का एकमात्र स्थायी इलाज स्टेम सेल प्रत्यारोपण (Stem Cell Transplant) माना जाता है। इसके लिए मरीज को उपयुक्त एचएलए (HLA) मैच वाला डोनर मिलना आवश्यक होता है।

भारत में कई संस्थाएं और स्टेम सेल डोनर रजिस्ट्रियां मरीजों के लिए उपयुक्त डोनर खोजने का कार्य कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक से अधिक लोगों के डोनर रजिस्ट्री से जुड़ने से मरीजों को जीवनरक्षक स्टेम सेल डोनर मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

आगे की राह

भारत सरकार द्वारा वर्ष 2023 में शुरू किया गया राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक बदलाव के लिए गांव-गांव तक जांच सुविधाएं पहुंचानी होंगी, नवजात शिशुओं की स्क्रीनिंग को व्यापक बनाना होगा और डोनर रजिस्ट्री को मजबूत करने के लिए सामाजिक संगठनों एवं संस्थाओं के साथ सहयोग बढ़ाना होगा।

सिकल सेल रोग से प्रभावित लाखों मरीज बेहतर उपचार और जागरूकता की प्रतीक्षा कर रहे हैं। समय रहते प्रभावी कदम उठाना आवश्यक है ताकि इस गंभीर बीमारी के बोझ को कम किया जा सके।