सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग भारत पहुंचे, कई अहम समझौते की उम्मीद

सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग आज मंगलवार देर शाम भारत पहुंचे। यह उनका तीन दिवसीय आधिकारिक दौरा है, जो भारत और सिंगापुर के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने का अहम मौका माना जा रहा है। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है। उनके साथ उनकी पत्नी और एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है, जिसमें कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वोंग गुरुवार को द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। उसी दिन वोंग राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी राष्ट्रपति भवन में मुलाकात करेंगे। बुधवार को सिंगापुर के प्रधानमंत्री महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए राजघाट जाएंगे। इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अन्य गणमान्य नेता भी उनसे मुलाकात करेंगे।

विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया कि इस यात्रा के दौरान कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। इनमें वित्त, डिजिटल नवाचार, कौशल विकास, नागरिक उड्डयन, समुद्री सहयोग और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि “सिंगापुर भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार है, खासकर हमारी ‘एक्ट ईस्ट’ नीति में। सितंबर 2024 में प्रधानमंत्री मोदी की सिंगापुर यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर तक उठाया गया था।”

यह दौरा भारत-सिंगापुर कूटनीतिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ के साथ भी मेल खा रहा है। इस अवसर पर दोनों देश अपने मजबूत और बहुआयामी सहयोग की समीक्षा करेंगे और भविष्य की दिशा तय करेंगे। दोनों प्रधानमंत्री क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे।

भारत और सिंगापुर ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत कई नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया है। इनमें स्थिरता, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटलाइजेशन, कौशल विकास, कनेक्टिविटी और अंतरिक्ष तकनीक शामिल हैं। यह साझेदारी दोनों देशों की मौजूदा चुनौतियों से निपटने और दीर्घकालिक मजबूती हासिल करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

यह यात्रा 13 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित तीसरे भारत-सिंगापुर मंत्रीस्तरीय गोलमेज सम्मेलन (ISMR) के बाद हो रही है। इस सम्मेलन में दोनों देशों के मंत्रियों ने छह प्रमुख क्षेत्रों -एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, कनेक्टिविटी, डिजिटलाइजेशन, स्वास्थ्य और चिकित्सा, कौशल विकास और स्थिरता में सहयोग की समीक्षा की थी और कई नए कदमों की पहचान की थी।-(IANS)