स्किल इंडिया मिशन को गति, पूर्वोत्तर में प्रशिक्षुता और उद्योग भागीदारी होगी मजबूत

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षुता के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना (पीएम-एनएपीएस) के तहत वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विशेष कार्यक्रम के विस्तार की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम का कार्यान्वयन भारतीय उद्यमिता संस्थान (आईआईई), गुवाहाटी करेगा। मंत्रालय ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों में प्रशिक्षुता की पहुंच बढ़ाना, उद्योगों और सरकारी संस्थानों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना तथा युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना है।

30,000 प्रशिक्षुओं को मिलेगा लाभ

मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस पहल का लक्ष्य बढ़ाकर 30,000 प्रशिक्षु निर्धारित किया है, जो प्रायोगिक चरण की तुलना में लगभग 15% अधिक है। इनमें 15,000 प्रशिक्षुओं को पूर्वोत्तर के बाहर सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों सहित विभिन्न संस्थानों में प्रशिक्षुता के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे, जबकि शेष 15,000 प्रशिक्षुओं को पूर्वोत्तर क्षेत्र के भीतर, उनके गृह राज्यों सहित, अवसर दिए जाएंगे।

57.58 करोड़ रुपए का आवंटन

सरकार ने इस पहल के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में 57.58 करोड़ रुपए का वित्तीय आवंटन किया है। यह राशि पीएम-एनएपीएस के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र घटक के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।

जयंत चौधरी ने बताया युवाओं के लिए बड़ा अवसर

केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र देश की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है, जहां प्रतिभाशाली और महत्वाकांक्षी युवा राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि प्रायोगिक परियोजना की सफलता ने साबित किया है कि सही अवसर और सहयोग मिलने पर युवा अपनी पूरी क्षमता का प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विस्तारित योजना से गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षुता तक पहुंच बढ़ेगी, स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा और उद्योगों की भागीदारी में वृद्धि होगी।

अतिरिक्त वित्तीय सहायता का भी मिलेगा लाभ

विस्तारित योजना के तहत पीएम-एनएपीएस के अंतर्गत मिलने वाली सहायता के अलावा प्रशिक्षुओं को 1,500 रुपए प्रतिमाह का अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। पहले यह सुविधा केवल अपने गृह राज्य से बाहर प्रशिक्षुता करने वाले युवाओं के लिए थी, लेकिन अब इसे पूर्वोत्तर के अपने ही राज्यों में कार्यरत प्रशिक्षुओं तक भी बढ़ा दिया गया है।

जागरूकता और उद्योग सहभागिता पर रहेगा जोर

मंत्रालय ने बताया कि वित्तीय सहायता के साथ-साथ कार्यशालाओं, जागरूकता अभियानों, नियोक्ता सहभागिता कार्यक्रमों तथा शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत के साथ सहयोग के माध्यम से प्रशिक्षुता व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

प्रायोगिक परियोजना के मिले उत्साहजनक परिणाम

मंत्रालय के अनुसार, प्रायोगिक चरण में 26,000 प्रशिक्षुओं के लक्ष्य के मुकाबले 23,470 युवाओं को प्रशिक्षुता के अवसर मिले, जो लक्ष्य का 90% से अधिक है। वित्त वर्ष 2024-25 के 15,562 प्रशिक्षुओं की तुलना में वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 23,470 हो गई, जो 51% की वृद्धि दर्शाती है। इनमें 13,673 प्रशिक्षुओं को अपने गृह राज्य से बाहर और 9,797 प्रशिक्षुओं को पूर्वोत्तर क्षेत्र के भीतर अवसर मिले।

महिलाओं और नियोक्ताओं की भागीदारी बढ़ी

प्रायोगिक कार्यक्रम के दौरान मेघालय में प्रशिक्षुता में सबसे अधिक 95% की वृद्धि दर्ज की गई। महिला प्रशिक्षुओं की भागीदारी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। वहीं, सरकारी संस्थानों के माध्यम से प्रशिक्षुता में भागीदारी दोगुनी हुई और निजी क्षेत्र की सहभागिता में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। (इनपुट: पीआईबी)

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