सोडियम-आयन बैटरी तकनीक को बढ़ावा, TDB ने दी मदद

भारत में सस्ती और टिकाऊ बैटरी तकनीक को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) ने उत्तराखंड के रुड़की स्थित Indigenous Energy Storage Technologies प्राइवेट लिमिटेड को वित्तीय सहायता दी है।

यह परियोजना बायो-वेस्ट और कृषि अपशिष्ट से “हार्ड कार्बन” बनाने पर आधारित है, जिसे सोडियम-आयन बैटरियों में इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उद्देश्य देश में उन्नत बैटरी सामग्री का स्वदेशी उत्पादन बढ़ाना है।

सरकार के अनुसार, सोडियम-आयन बैटरी तकनीक भविष्य में लिथियम-आयन बैटरियों का सस्ता और टिकाऊ विकल्प बन सकती है। इसका उपयोग ग्रिड स्टोरेज, यूपीएस, सोलर स्ट्रीट लाइट और ई-रिक्शा, ई-स्कूटर जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों में किया जा सकता है।

हार्ड कार्बन इस तकनीक का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो बेहतर ऊर्जा स्टोरेज क्षमता और लंबे समय तक काम करने की क्षमता देता है। खास बात यह है कि इसे कृषि और जैविक कचरे से तैयार किया जा सकता है, जिससे पर्यावरण को भी लाभ होगा।

यह परियोजना “वेस्ट-टू-वैल्यू” मॉडल पर आधारित है, जिसमें बेकार सामग्री को उपयोगी उत्पाद में बदला जाता है। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और देश में संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।

सरकार का मानना है कि इस पहल से भारत को अगली पीढ़ी की बैटरी तकनीक में मजबूत स्थिति मिलेगी और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में तेजी आएगी।