दक्षिण अफ्रीका गणराज्य के उपराष्ट्रपति शिपोकोसा पॉलस माशातिले ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। भारत की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर आए माशातिले का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति ने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक मित्रता, रणनीतिक साझेदारी और बहुआयामी सहयोग को और मजबूत बनाने पर बल दिया।
भारत-दक्षिण अफ्रीका संबंधों को बताया विशेष और ऐतिहासिक
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच विशेष मित्रता का संबंध है, जो केवल ऐतिहासिक ही नहीं बल्कि वर्तमान समय में भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी साझा मूल्यों, लोकतांत्रिक आदर्शों और आपसी सम्मान पर आधारित है। राष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 1997 में दक्षिण अफ्रीका पहला देश था, जिसके साथ भारत ने रणनीतिक साझेदारी स्थापित की थी।
‘ग्लोबल साउथ’ की मजबूत आवाज हैं दोनों देश
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका हमेशा ‘ग्लोबल साउथ’ की मुखर आवाज रहे हैं। दोनों देशों ने उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष का साझा अनुभव किया है और संयुक्त राष्ट्र, गुटनिरपेक्ष आंदोलन तथा जी20 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलकर काम किया है। उन्होंने कहा कि यह सहयोग न केवल दोनों देशों के लोगों के हित में है, बल्कि व्यापक स्तर पर ग्लोबल साउथ में शांति और समृद्धि को बढ़ावा देने में भी सहायक है।
द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की जरूरत
द्रौपदी मुर्मु ने भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच लगभग 15.5 अरब अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इसकी संभावनाएं इससे कहीं अधिक व्यापक हैं। उन्होंने दोनों देशों के बीच निवेश और कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल नीतिगत वातावरण बनाए रखने पर जोर दिया, ताकि कंपनियां एक-दूसरे के बाजारों में अपनी उपस्थिति और विस्तार बढ़ा सकें।
अफ्रीका के साथ साझेदारी को लेकर भारत की प्रतिबद्धता दोहराई
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अफ्रीका के साथ अपनी साझेदारी को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि भारत, अफ्रीकी संघ आयोग के साथ मिलकर इंडिया-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन की अगली बैठक जल्द आयोजित कराने की दिशा में काम करेगा।
घनिष्ठ सहयोग से दोनों देशों को होगा लाभ
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच घनिष्ठ सहयोग से दोनों देशों के लोगों को व्यापक लाभ मिल सकता है। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई। (इनपुट: पीआईबी)


