आईआईटीएम पुणे में अत्याधुनिक इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन, डब्ल्यूआईएसई-2026 सम्मेलन में जलवायु उद्यमिता पर जोर

भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान ने मौसम और जलवायु क्षेत्र में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए एक अत्याधुनिक इनक्यूबेशन सेंटर की शुरुआत की। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत संचालित संस्थान में इस अवसर पर “मौसम और जलवायु नवाचार सम्मेलन – डब्ल्यूआईएसई 2026” का आयोजन किया गया, जिसमें मौसम विज्ञान सेवाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी को नए दौर की शुरुआत माना गया।

पृथ्वी विज्ञान सचिव ने किया उद्घाटन

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. रविचंद्रन ने इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया। इस मौके पर राष्ट्रीय उन्नत अध्ययन संस्थान के निदेशक और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव शैलेश नाइक, आईआईटीएम के निदेशक ए. सूर्यचंद्र राव और अन्य वैज्ञानिक व विशेषज्ञ मौजूद रहे।

यह इनक्यूबेशन सेंटर राष्ट्रीय वायुमंडलीय प्रौद्योगिकी उद्यम (एनईएटी) का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के “मिशन मौसम” के तहत सार्वजनिक-निजी भागीदारी के जरिए तकनीकी विकास को बढ़ावा देने की पहल है।

जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी

एम. रविचंद्रन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न जटिल मौसमीय परिस्थितियों से निपटने के लिए पारंपरिक अनुसंधान से आगे बढ़कर बहु-हितधारक और समावेशी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “मिशन मौसम” उन्नत अवलोकन, एआई आधारित मॉडलिंग और स्थानीय स्तर तक मौसम जानकारी पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, जिससे देश को जलवायु-स्मार्ट राष्ट्र बनाने में मदद मिलेगी।

विज्ञान और व्यावहारिक उपयोग के बीच दूरी कम करने पर जोर

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान और व्यावहारिक अनुप्रयोगों के बीच की दूरी कम करना समय की जरूरत है। युवा उद्यमी विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं को बेहतर समझते हैं और उनके साथ सहयोग से ऐसे समाधान विकसित किए जा सकते हैं जो आर्थिक जरूरतों के साथ-साथ जीवन और आजीविका बचाने में भी उपयोगी हों।

मौसम पूर्वानुमान के चार प्रमुख स्तंभ

पृथ्वी विज्ञान सचिव एम रविचंद्रन ने कहा कि मौसम पूर्वानुमान में सुधार के लिए चार प्रमुख स्तंभों पर काम किया जा रहा है। इनमें अवलोकन, मॉडलिंग, उपयोगकर्ता-विशिष्ट अनुप्रयोग और प्रभावी प्रसार शामिल हैं।

उन्होंने नवप्रवर्तकों को मंत्रालय के रिमोट सेंसिंग और पुनर्विश्लेषित डेटा का उपयोग कर कृषि, विमानन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों के लिए किफायती और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित करने का आह्वान किया।

स्टार्टअप आधारित समाधानों पर चर्चा

उद्घाटन के बाद आयोजित उच्च स्तरीय पैनल चर्चा में मौसम और जलवायु विज्ञान में रणनीतिक बदलाव पर विचार-विमर्श हुआ। इसमें कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप आधारित व्यावहारिक समाधानों पर जोर दिया गया।

चर्चा में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि मौसम संबंधी जानकारी अब आर्थिक निर्णयों का महत्वपूर्ण आधार बनती जा रही है। नवप्रवर्तक अत्याधुनिक वायुमंडलीय डेटा को खाद्य सुरक्षा, ग्रिड स्थिरता और शहरी जलवायु अनुकूलन जैसे क्षेत्रों में उपयोगी समाधान में बदल रहे हैं।

जलवायु-तकनीक को बताया मुख्यधारा का अवसर

डब्ल्यूआईएसई 2026 सम्मेलन में इस बात पर बल दिया गया कि जलवायु-तकनीक नवाचार अब सीमित क्षेत्र नहीं रह गया है, बल्कि यह मुख्यधारा का व्यावसायिक अवसर और सामाजिक आवश्यकता बन चुका है।

सम्मेलन में राष्ट्रीय मध्यम श्रेणी मौसम पूर्वानुमान केंद्र, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागरीय अनुसंधान केंद्र, विभिन्न आईआईटी, आईआईएसईआर पुणे और अन्य प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए।

400 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

कार्यक्रम में जलवायु-तकनीक समुदाय से जुड़े लोगों की बड़ी भागीदारी रही। उद्घाटन समारोह में करीब 400 लोगों ने हिस्सा लिया, जबकि 100 स्टार्टअप उद्यमियों और युवा संस्थापकों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए वैज्ञानिक डेटा को व्यावहारिक और प्रभावकारी समाधानों में बदलने पर चर्चा की। (इनपुट: पीआईबी)