प्रतिक्रिया | Thursday, April 18, 2024

13/10/23 | 9:59 am

खुशवंत सिंह लिटरेचर फेस्टिवल हिमाचल में आज से आरंभ

हिमाचल प्रदेश की पर्यटन नगरी कसौली में देश के जाने-माने और प्रसिद्ध लेखक खुशवंत सिंह की याद में 12वां लिटरेचर फेस्टिवल (लिटफेस्ट) आज,13 अक्तूबर से आरंभ हो रहा है, जो 15 अक्तूबर तक चलेगा। इसमें कई नामी हस्तियां और प्रसिद्ध साहित्यकार भाग ले रहे हैं। यह लोग इस बार जी-20 सम्मेलन समेत कई ज्वलंत मुद्दों तथा फेस्ट के लिए निर्धारित थीम पर चर्चा करेंगे। इस वर्ष की थीम है 'क्रांति का प्रसारण टेलीविजन पर नहीं होगा: वह बदलाव आपको ही करना हैं, जो आप देखना चाहते हैं।' 

इस लिटफेस्ट की शुरुआत 2012 में खुशवंत सिंह की याद में उनके बेटे राहुल सिंह और कुछ दोस्तों ने मिलकर की थी। इसमें देश-विदेश के प्रसिद्ध लेखक और साहित्यकार ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा करते हैं। कोरोना काल में इस फेस्टिवल का आयोजन ऑनलाइन हुआ था। 13 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक कसौली क्लब में आयोजित होने वाले इस वर्ष के उत्सव का विषय है: वह बदलाव आपको ही करना हैं, जो आप देखना चाहते हैं।' 

विगत दिवस खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह ने मीडिया को बताया कि इस साल का साहित्यिक उत्सव महात्मा गांधी की प्रसिद्ध कहावत की थीम पर आधारित है। गांधी जी मेरे पिता के लिए एक बड़ी प्रेरणा थे, जो हमेशा उनका आदर करते थे। हमारे पास लगभग 40 वक्ताओं की एक दिलचस्प श्रृंखला है। इनमें पूर्व टेनिस खिलाड़ी जयदीप मुखर्जी, नौकरशाह से नेता बने मणिशंकर अय्यर, अनुभवी टीवी पत्रकार और लेखिका बरखा दत्त और अभिनेता और टीवी होस्ट कुब्रा सैत शामिल हैं।

साहित्यिक उत्सव में  शुक्रवार के लिए एंट्री  सुबह 9 बजे से होगी और रविवार को शाम 5 बजे बंद होगी । विज़िटर्स कसौली क्लब के मुख्य प्रवेश द्वार पर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। जबकि क्लब के सदस्यों को निःशुल्क प्रवेश मिलेगा, अन्य सभी को क्लब अतिथि शुल्क का भुगतान करना होगा। 

ज्ञात हो कि खुशवंत सिंह भारत के प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक, उपन्यासकार और इतिहासकार थे। एक पत्रकार के रूप में इन्होंने बहुत लोकप्रियता प्राप्त की है। खुशवंत सिंह का जन्म 2 फ़रवरी, 1915 को हुआ था, और इनकी मृत्यु: 20 मार्च, 2014 को हुई। 'भारत सरकार' के 'विदेश मन्त्रालय' में विदेश सेवा के सम्माननीय पद पर भी खुशवंत सिंह जी ने कार्य किया है। वर्ष 2000 में इनको 'वर्ष का ईमानदार व्यक्ति' सम्मान मिला था। 'पद्म भूषण' (1974) और 'पद्म विभूषण' (2007) जैसे अलंकरणों से भी इन्हें सम्मानित किया जा चुका है। खुशवंत सिंह ने कई अमूल्य रचनाएँ अपने पाठकों को प्रदान की हैं।

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आखरी अपडेट: 17th Apr 2024