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चौथे दिन भी शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 77,155 और निफ्टी 24,085 पर बंद

हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को भारतीय शेयर बाजार लगातार चौथे सत्र में बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। इस दौरान, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मेटल और पीएसयू बैंक के शेयरों के समर्थन से निफ्टी50 और सेंसेक्स में 0.40 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई।

बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 347.14 अंकों यानी 0.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,155.62 पर पहुंच गया, तो वहीं निफ्टी 50 96.55 अंक या 0.40 प्रतिशत बढ़कर 24,085.70 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,808.48 से 271.61 अंक बढ़कर 77,080.09 पर खुला और दिन के कारोबार में 77,218.99 का उच्चतम स्तर छुआ। वहीं, निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 23,989.15 से 55.35 अंक की मामूली बढ़त के साथ 24,044.50 पर खुला और दिन के कारोबार में 24,108.20 के इंट्रा-डे हाई पर पहुंच गया।

व्यापक बाजार ने प्रमुख सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया, जिसमें निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.52 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.79 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

वहीं, सेक्टरवार देखें तो निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी मेटल ने बेहतर प्रदर्शन किया, जिनमें 1-2 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। इसके साथ ही निफ्टी आईटी, निफ्टी ऑयल एंड गैस शेयरों में भी तेजी देखने को मिली। इसके विपरीत, निफ्टी ऑटो, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी एफएमसीजी में क्रमशः 0.62 प्रतिशत, 0.43 प्रतिशत और 0.17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

निफ्टी 50 में, ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (बीईएल), हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, एसबीआई लाइफ, एटर्नल, एचडीएफसी लाइफ और टाटा स्टील सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाले शेयरों की लिस्ट में शामिल रहे। वहीं, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, सिप्ला, बजाज फिनसर्व, ओएनजीसी और एक्सिस बैंक के शेयर सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे।

अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक शांति समझौते तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की योजना से वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। भू-राजनीतिक तनाव कम होने और ऊर्जा कीमतों में गिरावट आने से बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार गिर रही हैं और तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंचकर 74-75 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में कारोबार कर रही हैं। वहीं घरेलू वायदा बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें 7,100-7,200 रुपए के आसपास स्थिर बनी हुई हैं। तेल की कीमतों में यह गिरावट भारत के लिए राहत भरी है, क्योंकि इससे आयात बिल कम होने, महंगाई पर नियंत्रण और समग्र आर्थिक स्थिति मजबूत होने की संभावना बढ़ती है।

आने वाले दिनों में निवेशकों का ध्यान मुख्य रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया की प्रगति पर रहेगा। हाल के महीनों में मध्य-पूर्व संकट के कारण ऊर्जा कीमतों में उछाल आया था, जिसका असर महंगाई पर भी पड़ा। ऐसे में फेड की आगे की रणनीति वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

(इनपुट-आईएएनएस)