भारत की ऊर्जा सुरक्षा को अभूतपूर्व डिजिटल युग के अनुरूप मज़बूत करने का प्रयास अब राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गया है। स्मार्ट ग्रिड तकनीकों के बढ़ते उपयोग के साथ, पावर ग्रिड की साइबर सुरक्षा को महज़ एक तकनीकी आवश्यकता से कहीं अधिक, राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अत्यंत संवेदनशील स्तंभ माना जा रहा है।
साइबर विशेषज्ञ मल्टी-लेयर सुरक्षा, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल को तुरंत लागू करने पर जोर दे रहे हैं
लाखों उपभोक्ताओं, प्रमुख उद्योगों और राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों को निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने वाले इस नेटवर्क की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक से बचाव के लिए केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियां सतर्क हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ लगातार मल्टी-लेयर सुरक्षा, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रोटोकॉल को तत्काल लागू करने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं, और इस दिशा में जल्द ही ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है।
सबस्टेशनों में सुरक्षा बढ़ाने पर ज़ोर
यह स्वीकार किया गया है कि देश के कई प्रमुख ट्रांसमिशन सबस्टेशनों में नेक्स्ट जेनेरेशन फायरवॉल्स (NGFWs) जैसे आधुनिक सुरक्षा ढांचे की स्थापना में तेज़ी लाने की आवश्यकता है। बढ़ते साइबर खतरों को देखते हुए, सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से इन सबस्टेशनों को जल्द ही उच्च सुरक्षा मानकों से लैस करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
अधूरी प्रक्रियाओं को पूरा करने की तैयारी
साइबर सुरक्षा को अपग्रेड करने के लिए पूर्व में जारी किए गए टेंडर को अगस्त में रद्द किए जाने के बाद, अब इस प्रक्रिया को जल्द ही नए सिरे से शुरू करने और पूरा करने पर उच्च स्तरीय चर्चा चल रही है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पावर ग्रिड का पूरा नेटवर्क आधुनिक और भविष्य की ज़रूरतों के अनुरूप साइबर सुरक्षा मानकों से लैस हो, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा तंत्र साइबर हमलों का मुख्य निशाना बन रहे हैं।
संसदीय चिंताएं और सरकार की प्रतिबद्धता
इस विषय की गंभीरता को समझते हुए, 9 दिसंबर को लोकसभा में केंद्रीय बिजली मंत्री से इस संबंध में प्रश्न पूछे गए हैं। सरकार को उन सबस्टेशनों की पहचान, तत्काल हस्तक्षेप के लिए चिह्नित किए गए स्थानों, पिछले 12 महीनों के साइबर सुरक्षा ऑडिट के निष्कर्षों और अपग्रेडेशन योजना की नई समयसीमा पर जवाब देना है। संसद में उठाए गए ये सवाल इस बात को दर्शाते हैं कि केंद्र सरकार पावर ग्रिड की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और जल्द ही एक व्यापक व स्पष्ट कार्ययोजना प्रस्तुत करेगी।
विशेषज्ञों के सहयोग से मजबूत होगी सुरक्षा
विशेषज्ञों की यह चेतावनी कि ऊर्जा अवसंरचना वैश्विक साइबर युद्ध का मुख्य निशाना है, सरकार को त्वरित कार्रवाई के लिए प्रेरित कर रही है। पावर ग्रिड की सुरक्षा केवल तकनीकी मामला नहीं है, यह देश की ऊर्जा निर्भरता, उद्योगों की स्थिरता और आपातकालीन सेवाओं के संचालन से सीधा संबंध रखती है।
केंद्र सरकार पावर ग्रिड की साइबर सुरक्षा और सबस्टेशन सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर शीघ्र मजबूत करे
यह आवश्यक है कि पावर ग्रिड को मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था लागू करने और सबस्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था को जल्द से जल्द अंतरराष्ट्रीय मानकों पर अपग्रेड करने के लिए केंद्र सरकार स्पष्ट और ठोस दिशा-निर्देश जारी करे, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को दीर्घकालिक मज़बूती मिल सके।


