पीयूष गोयल ने भारतीय कारोबारों को वैश्विक स्तर पर अधिक अवसर दिलाने और निर्यात बढ़ाने के उद्देश्य से वाणिज्य विभाग तथा उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के अधिकारियों के साथ मंथन बैठक की।
बैठक में भारतीय कारोबारों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने, निर्यात प्रोत्साहन को मजबूत करने और देशभर के उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा की गई।
पीयूष गोयल ने कहा कि बैठक में निर्यात और निवेश को बढ़ावा देने, नए निर्यातकों के लिए अवसर तैयार करने तथा नए वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के उपायों पर विचार किया गया।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल वस्तु और सेवा निर्यात 4.6 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 863.11 अरब डॉलर तक पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 825.26 अरब डॉलर था।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका की शुल्क नीतियों से उत्पन्न अनिश्चितताओं के बावजूद भारत ने यह वृद्धि दर्ज की है।
वस्तु निर्यात में 0.93 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 441.78 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं, सेवा निर्यात 8.71 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि के साथ 421.32 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।
मंत्रालय के अनुसार, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं, व्यावसायिक समाधान और पेशेवर सेवाओं की वैश्विक मांग लगातार बनी हुई है, जिससे सेवा निर्यात को बढ़ावा मिला।
अप्रैल के पहले तीन सप्ताहों में कुल निर्यात में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 20 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई।
इस दौरान पेट्रोलियम उत्पादों और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।
भारत अब इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के प्रमुख निर्यातकों में उभर रहा है और कई वैश्विक कंपनियां देश में विनिर्माण इकाइयां स्थापित कर रही हैं।
पीयूष गोयल ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के बावजूद भारतीय निर्यातकों में उत्साह बना हुआ है और निर्यात में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।
-(इनपुटःएजेंसी)


