पीएमजीएसवाई को ‘कंस्ट्रक्शन’ से ‘कम्युनिटी’ तक ले जाएं, गांवों की तस्वीर बदलने के लिए नवाचार जरूरी: शिवराज सिंह चौहान

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर को संबोधित करते हुए अधिकारियों और अभियंताओं से आह्वान किया कि चिंतन शिविर को महज औपचारिकता न बनाएं, बल्कि जमीनी स्तर की समस्याओं के व्यवहारिक और नवाचारपूर्ण समाधान तलाशें। उन्होंने कहा कि पीएमजीएसवाई का अगला चरण केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण कनेक्टिविटी, निरंतर रखरखाव और ग्रामीण समुदायों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाना होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा और लापरवाही करने वाली एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।

गांवों की पगडंडियों से होकर गुजरता है विकसित भारत का रास्ता

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि महात्मा गांधी का मानना था कि भारत के विकास का रास्ता गांवों से होकर जाता है। जब तक गांवों का विकास नहीं होगा, तब तक देश का समग्र विकास संभव नहीं है। उन्होंने अपने बचपन का संस्मरण साझा करते हुए बताया कि गांव से भोपाल पढ़ने जाने के लिए उन्हें करीब 13 किलोमीटर का रास्ता पगडंडियों और कीचड़ के बीच घोड़े पर तय करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि सड़क न होने के कारण गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को खटिया पर ले जाने की मजबूरी उन्होंने स्वयं देखी है। कई बार समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण लोगों की जान चली जाती थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने इस स्थिति को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

8.50 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बनीं

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को नमन करते हुए चौहान ने कहा कि पीएमजीएसवाई ने ग्रामीण जनजीवन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने का काम किया है। देश में अब तक करीब 8.50 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण हो चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पीएमजीएसवाई के चौथे चरण में 62 हजार किलोमीटर नई सड़कों का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से 20 हजार किलोमीटर की स्वीकृति हो चुकी है और अब इन्हें तय समय-सीमा में पूरा करना प्राथमिकता है।

स्वीकृति से निर्माण तक 72 दिनों की समय-सीमा का पालन जरूरी

चौहान ने परियोजनाओं में देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि स्वीकृति से लेकर निर्माण कार्य शुरू होने तक 72 दिनों की निर्धारित समय-सीमा का कड़ाई से पालन होना चाहिए। जिन राज्यों में इसका पालन नहीं हो रहा है, उनका पूरा हिसाब-किताब तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि बार-बार टेंडर निरस्त होने या बोली नहीं आने जैसी समस्याओं का समाधान पहले से की गई ‘प्री-टेंडर प्लानिंग’ के जरिए किया जाना चाहिए। अनावश्यक देरी से निर्माण सामग्री की लागत बढ़ती है और परियोजनाएं भी लंबित होती हैं।

‘चिट्ठी-चिट्ठी का खेल बंद हो’, फॉरेस्ट क्लीयरेंस में तेजी लाएं

वन एवं पर्यावरण मंजूरियों में देरी पर केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि केवल चिट्ठियां लिखकर औपचारिकता पूरी करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि लंबित मामलों के समाधान के लिए पर्यावरण विभाग और जिला कलेक्टरों के साथ सीधे समन्वय किया जाए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों में काम को तेजी से पूरा कराने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए और लंबित मामलों का एकमुश्त निस्तारण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बनें वैज्ञानिक डीपीआर

बाढ़, भूस्खलन और अतिवृष्टि जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए चौहान ने कहा कि देश की भौगोलिक परिस्थितियां अलग-अलग हैं। इसलिए हर जगह एक ही इंजीनियरिंग मॉडल लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने डीपीआर तैयार करते समय स्थानीय ढलान, जल निकासी, पुलिया और जलभराव की स्थिति को ध्यान में रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि सड़क बनने के बाद जल निकासी की व्यवस्था न होने से ग्रामीणों के घरों में पानी भर जाए तो ऐसी सड़क का कोई औचित्य नहीं है। सड़क के साथ मजबूत ड्रेनेज, पर्याप्त पुलिया और पौधरोपण भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

गुणवत्ता में लापरवाही पर एजेंसियां होंगी ब्लैकलिस्ट

शिवराज सिंह चौहान ने निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि घटिया निर्माण करने वाली एजेंसियों को तत्काल ब्लैकलिस्ट किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि ब्लैकलिस्टेड ठेकेदार किसी दूसरे या रिश्तेदार के नाम से नई कंपनी बनाकर दोबारा सरकारी काम हासिल न कर सके। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निगरानी केवल दफ्तरों या औपचारिक दौरों तक सीमित न रहे। अधिकारी नियमित रूप से फील्ड में जाएं और औचक निरीक्षण कर निर्माण की वास्तविक स्थिति देखें।

बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को मिलेगी प्राथमिकता

चौहान ने पीएमजीएसवाई के तहत बेहतर काम करने वाले राज्यों की सराहना की। गुणवत्ता के क्षेत्र में गुजरात, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और राजस्थान ने बेहतर प्रदर्शन किया है। रखरखाव में पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु को बेहतर बताया गया। नई तकनीक फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) के इस्तेमाल में उत्तर प्रदेश के काम की सराहना की गई, जबकि संपत्तियों की क्यूआर कोडिंग के क्षेत्र में असम के नवाचार को उल्लेखनीय बताया गया। उन्होंने कहा कि समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ परियोजनाएं पूरी करने वाले राज्यों को आगामी स्वीकृतियों में वेटेज दिया जाएगा। ऐसे राज्यों के लिए विशेष सम्मान समारोह आयोजित कर उन्हें पुरस्कृत भी किया जाएगा। वहीं, खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों को अपनी कार्यशैली में सुधार करना होगा।

निर्माण के साथ ‘लाइफ साइकिल मैनेजमेंट’ पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सड़क निर्माण के बाद पांच वर्षों तक उसके रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की होती है। शुरुआती स्तर पर छोटे गड्ढों और क्षतियों की तुरंत मरम्मत कर दी जाए तो सड़क को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होंने राज्यों से कहा कि पांच वर्ष की गारंटी अवधि समाप्त होने के बाद भी सड़कों के रखरखाव के लिए स्थायी वित्तीय व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने मध्य प्रदेश में मंडी निधि से किए जा रहे रखरखाव के मॉडल का उदाहरण दिया।

पीएम जनमन के तहत संवेदनशील क्षेत्रों में तेज हो सड़क निर्माण

चौहान ने पीएम जनमन योजना के तहत छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली, झारखंड और आंध्र प्रदेश के दूरदराज तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण का काम युद्ध स्तर पर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में सड़क निर्माण केवल बुनियादी ढांचा तैयार करना नहीं, बल्कि लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने और राष्ट्र सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है।

‘कंस्ट्रक्शन से कनेक्टिविटी, कनेक्टिविटी से कंटिन्यूटी और कंटिन्यूटी से कम्युनिटी’

केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों और अभियंताओं से कहा कि अपने दायित्वों को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाना ही आज की सच्ची देशभक्ति है। उन्होंने कहा कि सरकार का काम केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका असर सीधे जनता के जीवन में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने पीएमजीएसवाई की सोच को नए विस्तार के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि इसका लक्ष्य ‘कंस्ट्रक्शन से कनेक्टिविटी, कनेक्टिविटी से कंटिन्यूटी और कंटिन्यूटी से कम्युनिटी’ होना चाहिए। उन्होंने प्रतिभागियों से लकीर के फकीर बनने के बजाय मौलिक, व्यावहारिक और नवाचारपूर्ण सुझाव देने को कहा, ताकि उन्हें नीति निर्माण में शामिल किया जा सके। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान, ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल सहित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए पीएमजीएसवाई के सचिव, मुख्य अभियंता और विशेषज्ञ मौजूद रहे। (इनपुट: पीआईबी)