तकनीक मानवता की सेवा करे, स्वास्थ्य सेवा के मूल में करुणा जरूरी: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को चिकित्सा अनुसंधान और नवाचार में अधिक निवेश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी गंभीर चुनौतियों का समाधान करने और चिकित्सा क्षेत्र में सुधार लाने के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों का प्रभावी उपयोग जरूरी है। विजयवाड़ा में डॉ. एनटीआर यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के रूबी जुबली समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य मानवता की सेवा करना होना चाहिए और स्वास्थ्य सेवा के मूल में करुणा बनी रहनी चाहिए।

चिकित्सा अनुसंधान और नवाचार में निवेश पर जोर

उपराष्ट्रपति ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में उभरती प्रौद्योगिकियों की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा अनुसंधान और नवाचार में निवेश बढ़ाकर स्वास्थ्य क्षेत्र की गंभीर चुनौतियों से निपटने की क्षमता विकसित की जा सकती है। उन्होंने तकनीकी प्रगति के साथ मानवीय संवेदनाओं और करुणा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

नशे के खिलाफ लड़ाई में नेतृत्व करें डॉक्टर

राधाकृष्णन ने डॉक्टरों से नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि चिकित्सक समाज को जागरूक करने और नशा मुक्त समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

दो दिवसीय आंध्र प्रदेश यात्रा पर उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति ने सोमवार को आंध्र प्रदेश की दो दिवसीय यात्रा शुरू की। यात्रा के दौरान तिरुपति स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर और तिरुचनूर स्थित श्री पद्मावती अम्मावरी मंदिर में दर्शन-पूजन का कार्यक्रम भी शामिल है।

महर्षि वाल्मीकि जयंती पर दिया संदेश

विजयवाड़ा पहुंचने से पहले राधाकृष्णन ने महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर नागरिकों को शुभकामनाएं दीं। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में उन्होंने कहा कि आदिकवि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण भारतीय संस्कृति और सभ्यतागत मूल्यों की अमूल्य धरोहर है। इसमें निहित सत्य, कर्तव्य, त्याग, करुणा और धर्म के आदर्श आज भी मानवता का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाएं नैतिक मूल्यों को अपनाने और सामंजस्यपूर्ण, संवेदनशील तथा सशक्त समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करती हैं।

विकसित भारत 2047 के लिए कानूनों में सुधार जरूरी

इससे पहले राधाकृष्णन ने दिल्ली में ‘सहयोगात्मक संघवाद और कानून सुधार : राष्ट्रीय और राज्य परिप्रेक्ष्य’ विषय पर आयोजित सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय का आह्वान

उपराष्ट्रपति ने ‘टीम इंडिया’ की भावना को मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर परामर्श, समन्वय और साझा जिम्मेदारी की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि व्यापक जनहित से जुड़े कार्यों में राजनीतिक मतभेद बाधा नहीं बनने चाहिए।

सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद का महत्व

राधाकृष्णन ने सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद को देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘टीम इंडिया’ की परिकल्पना केंद्र और राज्यों के बीच परामर्श, समन्वय और साझा जिम्मेदारी पर आधारित है। राष्ट्रीय हित और जनकल्याण के लिए सभी पक्षों को मिलकर काम करना चाहिए। (इनपुट: आईएएनएस)