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‘विकसित भारत 2047’ में जैव-अर्थव्यवस्था निभाएगी अहम भूमिका

सरकार का मानना है कि सतत कृषि को बढ़ावा देने वाली नीतियों और जैव-अर्थव्यवस्था से जुड़ी लक्षित पहलों के बल पर भारत जैव-अर्थव्यवस्था तथा जैव-आधारित कृषि निवेश क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग (डीसीपीसी) के सचिव तेजवीर सिंह ने कहा कि मजबूत वैज्ञानिक आधार, समृद्ध जैव विविधता और तेजी से विकसित हो रहे स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के कारण भारत में जैव-अर्थव्यवस्था और जैव-आधारित कृषि निवेश क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनने की अपार संभावनाएं हैं।

उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी एवं कार्यशाला ‘बायोपीएसएफ 2026’ के समापन सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही।

तेजवीर सिंह ने विश्वास जताया कि वैज्ञानिक उत्कृष्टता, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच प्रभावी साझेदारी तथा युवा नवोन्मेषकों के तकनीकी योगदान से भविष्य की टिकाऊ कृषि प्रणालियों को नई दिशा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि जैव-कीटनाशकों की सफलता केवल उनके विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए मजबूत फॉर्मूलेशन तकनीकों का विकास भी आवश्यक है। ऐसी तकनीकें उत्पाद की स्थिरता, खेतों में प्रभावशीलता, उपयोग में सरलता और किसानों के बीच स्वीकार्यता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

‘बायोपीएसएफ 2026’ का आयोजन गुरुग्राम स्थित कीटनाशक फॉर्मूलेशन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईपीएफटी) ने किया, जो रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है।

सचिव ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ और मजबूत जैव-अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते हुए देश में स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने, अनुसंधान को व्यावहारिक उपयोग से जोड़ने तथा जैव-आधारित रसायनों, फसल संरक्षण तकनीकों और टिकाऊ कृषि निवेश से जुड़े स्टार्टअप नवाचारों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।

मंत्रालय के अनुसार यह आयोजन आईपीएफटी के 36वें स्थापना दिवस समारोह के तहत आयोजित किया गया था। इसमें नीति निर्माता, वैज्ञानिक, उद्योग प्रतिनिधि, नियामक, शिक्षाविद, उद्यमी, स्टार्टअप, छात्र और शोधकर्ता शामिल हुए।

कार्यक्रम के दौरान जैव-आधारित कृषि निवेशों में हो रहे नवीनतम विकास और सतत कृषि में उनकी भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि जैव-आधारित समाधान कृषि क्षेत्र को अधिक पर्यावरण-अनुकूल, उत्पादक और टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

-IANS