मेडिकल डिवाइस निर्माण क्षेत्र में कारोबार सुगमता यानी ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मेडिकल डिवाइसेज़ नियम, 2017 में संशोधन का मसौदा जारी किया है। इस प्रस्ताव के तहत विभिन्न श्रेणियों के मेडिकल डिवाइस के निर्माण लाइसेंस जारी करने की समय-सीमा कम करने का प्रावधान किया गया है।
वर्तमान नियमों के अनुसार मेडिकल डिवाइस को जोखिम के आधार पर चार श्रेणियों—क्लास ए, बी, सी और डी—में वर्गीकृत किया गया है। इनमें क्लास डी सबसे अधिक जोखिम वाली श्रेणी है। प्रस्तावित संशोधन के तहत क्लास बी मेडिकल डिवाइस, जैसे ब्लड प्रेशर मॉनिटर, हाइपोडर्मिक नीडल और पल्स ऑक्सीमीटर के निर्माण लाइसेंस की समय-सीमा 140 दिनों से घटाकर 115 दिन करने का प्रस्ताव है।
इसी तरह क्लास सी और क्लास डी श्रेणी के उच्च जोखिम वाले मेडिकल डिवाइस, जिनमें कार्डियक स्टेंट, हिप और घुटना प्रत्यारोपण तथा अन्य ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट शामिल हैं, उनके निर्माण लाइसेंस की समय-सीमा 105 दिनों से घटाकर 90 दिन करने का प्रस्ताव रखा गया है।
मसौदा अधिसूचना में लाइसेंसिंग प्रक्रिया के प्रत्येक चरण—आवेदन की जांच, अधिसूचित निकायों द्वारा ऑडिट, अनुपालन सत्यापन और लाइसेंस जारी करने—के लिए भी स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित करने का प्रस्ताव है। इससे नियामकीय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, पूर्वानुमेय और प्रभावी बनने की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से मेडिकल डिवाइस उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा, नियामकीय प्रक्रियाओं में तेजी आएगी और देश के मरीजों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और मानक अनुरूप मेडिकल डिवाइस समय पर उपलब्ध हो सकेंगे।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने मसौदा अधिसूचना को सार्वजनिक टिप्पणियों और सुझावों के लिए जारी किया है। हितधारक निर्धारित अवधि के भीतर अपने सुझाव भेज सकते हैं।


