ग्रामीण क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने “महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल (MGGSI)” शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य खादी, हैंडलूम और हस्तशिल्प क्षेत्रों को मजबूत कर ग्रामीण रोजगार बढ़ाना है।
सरकार के अनुसार, इस पहल के तहत ग्रामीण उद्योगों को प्रशिक्षण, कौशल विकास और आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा, ताकि उनके उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर हो और उन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिल सके।
इस योजना से बुनकरों, कारीगरों और ग्रामीण युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। साथ ही “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP)” जैसी योजनाओं को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय उत्पादों को पहचान मिलेगी।
सरकार ने बताया कि हस्तशिल्प क्षेत्र के विकास के लिए नेशनल हैंडिक्राफ्ट डेवलपमेंट प्रोग्राम और क्लस्टर डेवलपमेंट स्कीम के तहत कारीगरों को प्रशिक्षण, मार्केटिंग, तकनीकी सहायता और वित्तीय मदद दी जा रही है।
हैंडलूम क्षेत्र में भी कई योजनाएं लागू हैं। तेलंगाना में 2020 से 2026 तक 2,066 बुनकरों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा 26 क्लस्टर में करीब 4,971 लाभार्थियों को 1,223.97 लाख रुपये की सहायता दी गई है।
कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रदर्शनियों और मेलों का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही ऑनलाइन बिक्री के लिए “इंडिया हैंडमेड” पोर्टल भी शुरू किया गया है।
सरकार ने देशभर में 16 डिजाइन रिसोर्स सेंटर भी स्थापित किए हैं, जिनमें एक हैदराबाद में है, ताकि डिजाइन और गुणवत्ता में सुधार हो सके।
इसके अलावा, उत्पादों की गुणवत्ता और पहचान के लिए “इंडिया हैंडलूम ब्रांड” और “हैंडलूम मार्क” जैसी प्रमाणन योजनाएं भी लागू की गई हैं।


