असम की एक कप चाय नाश्ते की मेज तक पहुंचने से पहले लंबी यात्रा तय करती है। इसकी शुरुआत चाय बागान से होती है, जहां पत्तियां तोड़ी जाती हैं। इसके बाद वे प्रसंस्करण कारखाने तक पहुंचती हैं और फिर सड़क के जरिए व्यापारियों, बाजारों और अंततः उन शहरों तक जाती हैं, जहां असम की प्रसिद्ध चाय दैनिक जीवन का हिस्सा बनती है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने इस महीने की शुरुआत में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के 135.87 किलोमीटर लंबे, चार लेन वाले, नियंत्रित प्रवेश वाले गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह कॉरिडोर एनएच-15 का हिस्सा है और असम की महत्वपूर्ण आर्थिक एवं संपर्क श्रृंखला में एक नई कड़ी जोड़ेगा।
असम और अरुणाचल के बीच बेहतर संपर्क
यह कॉरिडोर असम और अरुणाचल प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के बीच संपर्क बेहतर बनाने के लिए प्रस्तावित है। इसे 8,970.20 करोड़ रुपए की कुल पूंजीगत लागत से विकसित किया जाएगा और यह गुवाहाटी के निकट बैहाटा चारियाली को तेजपुर से जोड़ेगा। इसमें 15.11 किलोमीटर लंबा मंगलदोई बाईपास शामिल नहीं है। परियोजना को बिल्ट-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) टोल मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा।
यात्रा समय में 50% तक कमी की उम्मीद
कॉरिडोर से औसत यात्रा गति में 100% तक वृद्धि, यात्रा समय में 50% तक कमी, ईंधन दक्षता में सुधार और वाहनों की परिचालन लागत में कमी आने की उम्मीद है। परियोजना में 58.7 किलोमीटर लंबे पांच प्रमुख बाईपास का निर्माण भी शामिल है। इनका उद्देश्य बैहाटा चारियाली, सिपाझार, खारूपेटिया, डेकियाजुली और तेजपुर के आसपास यातायात की भीड़ कम करना है। यह कॉरिडोर असम के गुवाहाटी को अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर और पासीघाट से जोड़ने वाले राजमार्ग संपर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा भी बनेगा, जिससे क्षेत्रीय संपर्क मजबूत होगा और उत्तर-पूर्व में आवागमन बेहतर होगा।
चाय व्यापार के लिए बेहतर सड़कें
असम का चाय उद्योग पहले से ही औपचारिक बाजारों से गहराई से जुड़ा हुआ है। टी बोर्ड इंडिया गुवाहाटी में नीलामी से संबंधित अवसंरचना का संचालन करता है और इस केंद्र के लिए साप्ताहिक नीलामी आंकड़े प्रकाशित करता है। यह क्षेत्र के चाय व्यापार में गुवाहाटी की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। अधिक सुगम और पूर्वानुमानित राजमार्ग यात्रा चाय उत्पादकों और परिवहनकर्ताओं के लिए कई स्तरों पर लाभकारी हो सकती है। बेहतर सड़क का लाभ केवल वाहन के जल्दी गंतव्य तक पहुंचने तक सीमित नहीं है, बल्कि कम रुकावट, अधिक पूर्वानुमानित यात्रा, वाहनों की कम परिचालन लागत और माल की सुचारू आवाजाही से भी जुड़ा है।
कृषि और व्यापार को मिलेगी गति
गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर की व्यापक भूमिका भी इसी दिशा में परिकल्पित की गई है। परियोजना की योजना यात्रियों और माल की तेज एवं सुरक्षित आवाजाही के साथ कृषि क्षेत्रों, उद्योगों और व्यापार मार्गों को जोड़ने के लिए बनाई गई है। बेहतर सड़क संपर्क से उत्पादन केंद्रों और बाजारों के बीच दूरी कम होने के साथ क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
चाय पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
इस संपर्क व्यवस्था में चाय पर्यटन के लिए भी नए अवसर छिपे हैं। असम के चाय बागानों का आकर्षण केवल चाय उत्पादन तक सीमित नहीं है। चाय बागान, प्रसंस्करण कारखाने, विरासत और स्थानीय संस्कृति मिलकर व्यापक पर्यटन अनुभव तैयार कर सकते हैं। नए कॉरिडोर से मां कामाख्या मंदिर, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और ओरंग राष्ट्रीय उद्यान जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी में सुधार होने की उम्मीद है। इससे गुवाहाटी, तेजपुर और व्यापक उत्तर असम क्षेत्र को जोड़ने वाले मजबूत पर्यटन सर्किट विकसित होने की संभावना बढ़ेगी।
पुल, फ्लाईओवर और अंडरपास से मजबूत होगा कॉरिडोर
चार लेन वाले एक्सेस-कंट्रोल राजमार्ग के साथ परियोजना में 15 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 19 फ्लाईओवर, तेजपुर बाईपास में एक हाथी अंडरपास, 46 अंडरपास और 210 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड का प्रावधान है। सर्विस रोड का उद्देश्य क्रॉस-मूवमेंट को बनाए रखते हुए कॉरिडोर को एक्सेस-कंट्रोल्ड स्वरूप में विकसित करना है। इसे पीएम गतिशक्ति के तहत आठ आर्थिक केंद्रों, दो सामाजिक केंद्रों, तीन पर्यटन केंद्रों और सात लॉजिस्टिक्स केंद्रों से जोड़ने के लिए डिजाइन किया गया है। इनमें तीन प्रमुख रेलवे स्टेशन, दो हवाई अड्डे और दो जलमार्ग टर्मिनल शामिल हैं।
शहरों पर यातायात का दबाव होगा कम
कॉरिडोर से तेज यातायात के साथ रणनीतिक और शहरी आवागमन से जुड़े लाभ भी मिलने की उम्मीद है। इसमें तेजपुर बाईपास पर 4.9 किलोमीटर लंबी आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) का प्रावधान है, जिसे भारतीय वायुसेना के समन्वय से विकसित करने की योजना है। साथ ही, यह ब्रह्मपुत्र के दक्षिणी तट के साथ मौजूदा एनएच-27 पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर पर यातायात का दबाव कम करने में भी सहायक होगा। कुल 58.7 किलोमीटर में फैले पांच प्रमुख बाईपास बैहाटा चारियाली, सिपाझार, खारूपेटिया, डेकियाजुली और तेजपुर सहित घनी आबादी वाले शहरों से भारी यातायात को बाहर निकालेंगे। इससे भीड़भाड़ कम होने और स्थानीय समुदायों के लिए सड़क सुरक्षा बेहतर होने की उम्मीद है। (इनपुट: पीआईबी)


