भारत में स्ट्रोक मृत्यु और दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। स्ट्रोक की स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण है—उपचार में देरी होने पर लगभग 1.9 बिलियन मस्तिष्क कोशिकाएं प्रति मिनट नष्ट हो जाती हैं। सही समय पर उपचार मिलने से मृत्यु और आजीवन विकलांगता में अत्यधिक कमी आ सकती है। यद्पि, स्ट्रोक के उपचार में सबसे बड़ी चुनौती रोगियों को स्ट्रोक के लिए तैयार अस्पताल तक पहुंचने में लगने वाला समय है।
यह दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले स्ट्रोक रोगियों के लिए अस्पतालों तक शीघ्र पहुंचने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने इस गंभीर समस्या में कमी लाने के लिए असम सरकार को दो मोबाइल स्ट्रोक यूनिट (एमएसयू) सौंपी हैं। यह दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले स्ट्रोक रोगियों के लिए अस्पतालों तक शीघ्र पहुंचने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। अब अस्पताल ही सीधे रोगियों तक पहुंचने लगे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के मार्गदर्शन में विकसित यह पहल, सरकार की इस प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि सबसे चुनौतीपूर्ण भौगोलिक क्षेत्रों में भी, सबसे निर्धन, वंचित और निर्बल आबादी, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, तक उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचें।
वहीं स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव और आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने असम सरकार को मोबाइल स्ट्रोक यूनिट (एमएसयू) सौंपते हुए कहा, “मोबाइल स्ट्रोक यूनिट सबसे पहले जर्मनी में विकसित की गई थीं और बाद में प्रमुख वैश्विक शहरों में इनका मूल्यांकन किया गया। भारत ने पूर्वोत्तर भारत के ग्रामीण, दूरस्थ और दुर्गम भूभागों में ऐसी यूनिटों का मूल्यांकन किया है। हम ग्रामीण क्षेत्रों में तीव्र इस्केमिक स्ट्रोक के रोगियों के उपचार के लिए आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के साथ एमएसयू के सफल एकीकरण की रिपोर्ट करने वाला विश्व स्तर पर दूसरा देश भी हैं।”
क्या है एमएसयू
आपको बता दें, एमएसयू एक चलता-फिरता अस्पताल है, जो सीटी स्कैनर, विशेषज्ञों से टेलीकंसल्टेशन, प्वाइंट-ऑफ-केयर प्रयोगशाला और रक्त के थक्के तोड़ने वाली दवाओं से सुसज्जित है। यह रोगी के घर पर या उसके आस-पास ही स्ट्रोक का शीघ्र निदान और उपचार करने में सक्षम बनाता है। यह नवोन्मेषण विशेष रूप से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां अस्पतालों तक पहुंचने में कई घंटे लग सकते हैं। विशेषज्ञ टेलीकंसल्टेशन के माध्यम से, एमएसयू स्ट्रोक के प्रकार की शीघ्र पहचान और उपचार की त्वरित शुरुआत को संभव बनाता है-जिससे जीवन बचता है और विकलांगता को रोका जा सकता है।
पूर्वोत्तर में स्ट्रोक का प्रकोप बहुत अधिक है
दरअसल, पूर्वोत्तर में स्ट्रोक का प्रकोप बहुत अधिक है। दुर्गम भूभाग, लंबी दूरी और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की सीमित उपलब्धता के कारण हमेशा समय पर स्ट्रोक का उपचार चुनौतीपूर्ण रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए आईसीएमआर ने डिब्रूगढ़ स्थित असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट के नेतृत्व में एक स्ट्रोक यूनिट और तेजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल एवं बैपटिस्ट क्रिश्चियन अस्पताल में चिकित्सकों के नेतृत्व में स्ट्रोक यूनिट स्थापित की है। मोबाइल स्ट्रोक यूनिट को अस्पताल पहुंचने से पहले ही स्ट्रोक की देखभाल की इस व्यवस्था में शामिल किया गया है।
एमएसयू को 2,300 से अधिक आपातकालीन कॉल प्राप्त हुए
इसके परिणाम रूपांतरकारी रहे हैं। इस मॉडल ने उपचार का समय लगभग 24 घंटे से घटाकर लगभग 2 घंटे कर दिया, मृत्यु दर में एक तिहाई की कमी आई और विकलांगता आठ गुना कम हो गई। 2021 से अगस्त 2024 के बीच, एमएसयू को 2,300 से अधिक आपातकालीन कॉल प्राप्त हुए। प्रशिक्षित नर्सों ने स्ट्रोक के 294 संदिग्ध मामलों की जांच की, जिनमें से 90 प्रतिशत रोगियों का उपचार उनके घर पर ही किया गया। एमएसयू को 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा के साथ एकीकृत करने से इसकी पहुंच 100 किलोमीटर के दायरे तक बढ़ गई।


