भारत-ईयू एफटीए से रोजगार और कौशल के नए अवसर खुलेंगे: स्वीडिश राजदूत

भारत और यूरोपीय यूनियन (ईयू) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को ‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील’ के रूप में देखा जा रहा है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में इस समझौते को एक नई उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है। तमाम यूरोपीय देश भारत के साथ व्यापार और निवेश को लेकर उत्साहित हैं। इसी बीच भारत में स्वीडन के राजदूत जैन थेस्लेफ ने खास बातचीत में कहा कि यह एफटीए रोजगार, कौशल और नवाचार के नए अवसर खोलेगा।

भारत-ईयू एफटीए ऐतिहासिक भरोसे का प्रतीक

भारत-ईयू समझौते को लेकर स्वीडन के राजदूत जैन थेस्लेफ ने कहा, “यह एक ऐतिहासिक समझौता है। यह दिखाता है कि भारत यूरोपीय यूनियन पर कितना भरोसा करता है और ईयू भारत पर कितना भरोसा करता है। स्वीडन के लिए, जिसकी भारत में पहले से ही मजबूत मौजूदगी है, यह उन कंपनियों के लिए भी नए दरवाजे खोलने वाला है जो अभी तक भारत में नहीं हैं।” उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत और यूरोप के बीच व्यापार करने की बाधाओं को कम करता है और खासतौर पर छोटी और मझोली कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा करता है।

एसएमई और एमएसएमई के लिए खुलेंगे नए अवसर

स्वीडिश राजदूत ने कहा कि इस एफटीए से स्वीडन की स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एसएमई) और भारत की माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) को बड़ा फायदा होगा। उन्होंने कहा, “हम जानते हैं कि रोजगार का सृजन मुख्य रूप से छोटी और मिडिल-साइज कंपनियों में होता है। भारत में प्रतिभा का खजाना है। यहां क्रिएटिविटी और इनोवेशन भरपूर है और यही इस समझौते को और खास बनाता है।”

स्वीडिश कंपनियों के लिए भारत बड़ा बाजार

थेस्लेफ ने बताया कि भारत में पहले से ही करीब 400 स्वीडिश कंपनियां सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि भारत में मौजूद सभी ईयू कंपनियों में से लगभग 7% स्वीडिश कंपनियां हैं। उन्होंने कहा, “यह उन कंपनियों के लिए एक मजबूत संकेत है जो अभी तक भारत में नहीं आई हैं। यह एक ऐसा बाजार है, जहां निवेश करना चाहिए, मैन्युफैक्चरिंग करनी चाहिए और नए प्रोडक्ट विकसित करने चाहिए।”

वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग को भी मिलेगा बढ़ावा

स्वीडिश राजदूत ने कहा कि यह एफटीए केवल व्यापार और निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग के लिए भी एक बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा, “यह हमारे वैज्ञानिक और तकनीकी साझेदारों के लिए भी एक निमंत्रण है। यह सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस बनाने, रिसर्च और इनोवेशन को आगे बढ़ाने का अवसर देता है। स्वीडन ऑटोमोटिव, आईटी, फार्मास्युटिकल्स और अन्य कई क्षेत्रों में भारत के साथ पहले से गहराई से जुड़ा हुआ है।”

दोनों तरफ से निवेश और रोजगार का सृजन

थेस्लेफ ने कहा कि यह समझौता एकतरफा नहीं है, बल्कि दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद है। उन्होंने बताया कि स्वीडन में पहले से ही 75 से 80 भारतीय कंपनियां निवेश कर चुकी हैं, जिनमें से कुछ ने बड़े निवेश किए हैं। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ व्यापार नहीं है। यह नौकरी बनाने और दोनों तरफ वैल्यू क्रिएट करने की बात है। भारतीय कंपनियां भी स्वीडन में आ रही हैं और इससे दोनों देशों को फायदा हो रहा है।”

भारतीय युवाओं के लिए कौशल और करियर के नए रास्ते

स्वीडन में भारतीयों के अवसरों को लेकर स्वीडिश राजदूत ने कहा कि जब निवेश होता है, तो उससे नौकरियां पैदा होती हैं और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा, “जब प्रतिभाशाली भारतीय स्वीडन आते हैं और हमारे इनोवेशन इकोसिस्टम का हिस्सा बनते हैं, तो वे सिर्फ कमाई नहीं करते, बल्कि कौशल और अनुभव भी लेकर लौटते हैं। यह भारत के तकनीकी विकास के लिए भी फायदेमंद है।” उन्होंने बताया कि वर्तमान में स्वीडन आने वाले विदेशियों में भारतीय सबसे बड़ा समूह हैं और 2030 तक स्वीडन की आबादी का लगभग 1% भारतीय होने की उम्मीद है। (इनपुट: आईएएनएस)