भारत के भौगोलिक संकेतक (GI) उत्पादों की आर्थिक क्षमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य देशभर में GI-टैग वाले उत्पादों के लिए बाजार पहुंच, डिजिटल एकीकरण और व्यावसायीकरण को मजबूत करना है।
इस साझेदारी के तहत दोनों विभाग पारंपरिक और स्थानीय शिल्पों को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य, बड़े स्तर पर विस्तार योग्य और निर्यात के लिए तैयार उद्यमों में बदलने की दिशा में काम करेंगे।
इस सहयोग का उद्देश्य GI उत्पादों को मिली कानूनी सुरक्षा और उनके व्यापक आर्थिक उपयोग के बीच की खाई को कम करना है। इसके लिए गुणवत्ता मानकीकरण, ब्रांडिंग, बाजार विस्तार और उद्यम विकास पर जोर दिया जाएगा।
DPIIT को Geographical Indications of Goods (Registration and Protection) Act, 1999 के तहत भौगोलिक संकेतकों के पंजीकरण और संरक्षण की जिम्मेदारी है, जबकि MSME मंत्रालय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के साथ-साथ पारंपरिक उद्योगों और कारीगरों के विकास की देखरेख करता है। दोनों विभाग मिलकर देश के GI इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए कई पहल लागू करेंगे।
मंत्रालय के अनुसार, दोनों संगठन संयुक्त पहलों के तहत ODOP (One District One Product) को अपने कार्यक्रमों और हस्तक्षेपों में शामिल करेंगे। इसके अलावा GI समूहों और अधिकृत उपयोगकर्ताओं को ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) और गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर ‘Bharat GI’ नाम से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा।
दोनों मंत्रालय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों तथा खरीदार-विक्रेता बैठकों में विशेष GI पवेलियन भी स्थापित करेंगे। इनका उद्देश्य भारतीय GI उत्पादों के लिए घरेलू और वैश्विक बाजार तैयार करना होगा।
इस पहल से कारीगरों, बुनकरों और उत्पादक समूहों के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा होने तथा प्रीमियम उपभोक्ताओं और निर्यात बाजारों तक उनकी पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है।
मंत्रालय ने कहा कि यह सहयोग क्षमता निर्माण, डिजिटल सशक्तीकरण और बेहतर बाजार पहुंच के जरिए भारत के GI इकोसिस्टम को मजबूत करेगा।
इसके साथ ही GI उत्पादों को प्रीमियम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने में मदद मिलेगी, जिससे आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल के विजन को भी बढ़ावा मिलेगा।
-आईएएनएस


