वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (GST) सुधारों के अगले चरण में कर अनुपालन को आसान बनाने पर जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन को आगे बढ़ाना और अर्थव्यवस्था को गति देना है।
सीतारमण ने LinkedIn पर साझा एक लेख में कहा कि Next-Gen GST सुधारों का लक्ष्य करदाताओं को राहत देने के साथ अर्थव्यवस्था को और गति देना है। उन्होंने बताया कि 22 सितंबर 2025 को लागू किए गए GST दरों में बदलाव सुधारों का पहला चरण था, जबकि प्रक्रिया से जुड़े अगले बदलाव जल्द ही GST परिषद के सामने रखे जाएंगे।
वित्त मंत्री ने कहा कि अगले चरण के सुधारों का उद्देश्य परिवारों को राहत देना, कारोबारियों को अधिक निश्चितता प्रदान करना और करदाताओं के लिए अपनी जिम्मेदारियां पूरी करना आसान बनाना है।
उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में घोषित कर योग्य आपूर्ति का मूल्य 25.8 प्रतिशत बढ़ा है।
अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान सकल GST संग्रह 11.6 प्रतिशत बढ़कर 12.46 लाख करोड़ रुपये हो गया। जून से सितंबर तक लगातार चार महीनों में GST संग्रह में सालाना आधार पर दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की गई और इस अवधि में कुल संग्रह करीब 15 प्रतिशत बढ़ा।
सीतारमण के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में रिफंड के बाद शुद्ध GST संग्रह में 10.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सुधारों के बाद उपभोक्ता बिक्री या B2C आपूर्ति में भी 26.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अगस्त के अंत तक GST पंजीकरण की संख्या करीब 1.71 करोड़ हो गई, जो एक साल पहले की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत अधिक है। अप्रैल-सितंबर के दौरान करीब 1.80 लाख करोड़ रुपये का रिफंड किया गया। वित्त मंत्री ने कहा कि कारोबारियों के लिए रिफंड की प्रक्रिया में अधिक निश्चितता महत्वपूर्ण है।
उन्होंने यह भी बताया कि राज्यों के कुल SGST राजस्व में, IGST निपटान में राज्यों के हिस्से को शामिल करने के बाद, अप्रैल-सितंबर के दौरान करीब 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
सीतारमण ने कहा कि 7 अक्टूबर को GST परिषद के सामने रखे जाने वाले प्रस्ताव राज्यों के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किए गए हैं। इनका उद्देश्य GST अनुपालन में लगने वाले समय और लागत को कम करना है।
वित्त मंत्री ने कहा कि सरल और अधिक पूर्वानुमान योग्य GST व्यवस्था से उद्यमों को विस्तार करने में मदद मिलेगी। इससे Tier-2 और Tier-3 शहरों में छोटे कारोबार भी आगे बढ़ सकेंगे और देश की आर्थिक वृद्धि में योगदान दे सकेंगे।
-(इनपुटः IANS)


