प्रतिक्रिया | Friday, April 04, 2025

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जन औषधि दवाओं की कीमतें खुले बाजार में उपलब्ध ब्रांडेड दवाओं की कीमतों से 50 से 80 प्रतिशत कम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर, प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के बारे में जागरूकता बढ़ाने और जेनेरिक दवाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर साल 7 मार्च को ‘जन औषधि दिवस’ मनाया जाता है। आधिकारिक बयान के अनुसार वर्तमान में देश भर में 15,000 से अधिक जन औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं, जो देश के सभी जिलों को कवर करते हैं। इस योजना के तहत सरकार ने 31 मार्च, 2027 तक देश भर में 25,000 जन औषधि केंद्र खोलने का लक्ष्य रखा है। योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने और जेनेरिक दवाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए 1 से 7 मार्च तक पूरे देश में सप्ताह भर के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

सात दिवसीय ‘जन औषधि दिवस 2025 समारोह’ की शुरुआत नई दिल्ली में 1 मार्च को केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा द्वारा प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना को बढ़ावा देने के लिए रथ और वाहनों को हरी झंडी दिखाने के साथ हुई थी। दूसरे दिन जन आरोग्य मेला आयोजित किया गया, जिसमें हेरिटेज वॉक और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 500 से अधिक स्वास्थ्य शिविर लगाए गए। तीसरे दिन बच्चों की भागीदारी और न्यूट्रास्युटिकल उत्पादों के वितरण पर ध्यान केंद्रित किया गया। चौथे दिन जन औषधि उत्पादों की सामर्थ्य को प्रदर्शित करने के लिए सैनिटरी पैड वितरण में महिलाओं की भागीदारी पर प्रकाश डाला गया। पांचवें दिन 30 शहरों में फार्मासिस्ट जागरूकता सेमिनार आयोजित किए गए। छठे दिन जन औषधि मित्र स्वयंसेवक पंजीकरण अभियान चलाया गया।

“प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (पीएमबीजेपी)” को नवंबर 2008 में रसायन और उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्यूटिकल्स विभाग द्वारा केंद्रीय फार्मा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के सहयोग से लॉन्च किया गया था। इस पहल का उद्देश्य प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र (पीएमबीजेके) नामक समर्पित दुकानों के माध्यम से जनता को सस्ती कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण दवाइयाँ उपलब्ध कराना है।

पीएमबीजेपी केंद्रों पर 1 रुपये प्रति पैड की दर से उपलब्ध

भारतीय महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, जन औषधि सुविधा ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन 27 अगस्त 2019 को लॉन्च किए गए। जन औषधि सुविधा नैपकिन देश भर में 15000 से अधिक पीएमबीजेपी केंद्रों पर बिक्री के लिए उपलब्ध कराए जा रहे हैं। 31.01.2025 तक सुविधा नैपकिन की संचयी बिक्री 72 करोड़ है।

सुगम मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया गया

जन औषधि सुगम मोबाइल एप्लिकेशन अगस्त, 2019 में लॉन्च किया गया था। ऐप में विभिन्न उपयोगकर्ता-अनुकूल विशेषताएं हैं जैसे – गूगल मानचित्र के माध्यम से नजदीकी जन औषधि केंद्र का पता लगाना, जन औषधि जेनेरिक दवाओं की खोज करना, एमआरपी के संदर्भ में जेनेरिक बनाम ब्रांडेड दवाओं की कीमतों की तुलना करना, समग्र बचत आदि।

पीएमबीजेपी की विशेषताएं

इस योजना की एक अनूठी विशेषता यह है कि इसका संचालन सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ निजी उद्यमियों द्वारा भी किया जाता है। जन औषधि दवाओं की कीमतें खुले बाजार में उपलब्ध ब्रांडेड दवाओं की कीमतों से 50%-80% कम हैं । उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए दवाएं केवल विश्व स्वास्थ्य संगठन – अच्छे विनिर्माण अभ्यास (डब्ल्यूएचओ-जीएमपी) प्रमाणित निर्माताओं से ही खरीदी जाती हैं।

वहीं, सर्वोत्तम गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए दवा के प्रत्येक बैच का परीक्षण ‘राष्ट्रीय परीक्षण और अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड’ (एनएबीएल) द्वारा मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में किया जाता है।

पीएमबीजेपी केंद्रों को 2.00 लाख रुपये की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है

आपको बता दें, 20,000/- रुपए प्रति माह तक का प्रोत्साहन मासिक खरीद के 20% की दर से दिया जाता है तथा यह स्टॉकिंग अधिदेश के अधीन है। इसके अलावा पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी क्षेत्रों, द्वीप क्षेत्रों और नीति आयोग द्वारा आकांक्षी जिले के रूप में उल्लिखित पिछड़े क्षेत्रों में या महिला उद्यमी, पूर्व सैनिक दिव्यांग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति द्वारा खोले गए पीएमबीजेपी केंद्रों को 2.00 लाख रुपये की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।

पीएमबीजेपी पहल के तहत कुछ गतिविधियाँ इस प्रकार हैं-

जागरूकता बढ़ाना-प्राथमिक लक्ष्यों में से एक है जेनेरिक दवाओं के लाभों के बारे में जनता को शिक्षित करना, इस बात पर ज़ोर देना कि सस्ता होना गुणवत्ता से समझौता नहीं है। इस पहल का उद्देश्य इस गलत धारणा को दूर करना है कि उच्च कीमतें बेहतर गुणवत्ता का संकेत देती हैं।

जेनेरिक दवाओं के नुस्खों को प्रोत्साहित करना-पीएमबीजेपी का उद्देश्य स्वास्थ्य पेशेवरों, विशेष रूप से सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले पेशेवरों को जेनेरिक दवाओं के विकल्प लिखने के लिए प्रेरित करना है, जिससे लागत प्रभावी उपचार विकल्पों को बढ़ावा मिले।

पहुंच में वृद्धि -इस पहल का उद्देश्य विभिन्न चिकित्सीय श्रेणियों में आमतौर पर प्रयुक्त होने वाली जेनेरिक दवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध कराना है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आवश्यक स्वास्थ्य देखभाल उत्पाद सभी के लिए, विशेष रूप से वंचित लोगों के लिए उपलब्ध हों।

इस योजना ने स्वरोजगार के लिए एक अवसर भी बनाया

दरअसल प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना ने आम जनता को किफायती दामों पर गुणवत्तापूर्ण दवाइयाँ उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिससे देश के हर कोने तक स्वास्थ्य सेवा पहुँचना सुनिश्चित हुआ है। सभी जिलों में अब 15,000 से अधिक जन औषधि केंद्रों के चालू होने के साथ, इस योजना ने न केवल स्वास्थ्य सेवा की सामर्थ्य को बढ़ाया है, बल्कि स्वरोजगार के लिए एक अवसर भी बनाया है, जिससे स्थायी और नियमित आय की प्राप्त की जा रही है।

 

 

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आखरी अपडेट: 4th Apr 2025