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स्वदेशी तकनीक से नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा

जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्वदेशी सौर सेल तकनीक का विकास ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना को दर्शाता है और भारत विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।

उन्होंने कोलकाता स्थित Indian Association for the Cultivation of Science परिसर में स्वदेशी रूप से विकसित प्लाज्मा एन्हांस्ड केमिकल वेपर डिपोजिशन (PECVD) प्रणाली का उद्घाटन किया।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, इस प्रणाली को भारत के पहले अमोर्फस सिलिकॉन सौर सेल के निर्माण के लिए विकसित किया गया है।

मंत्री ने संस्थान के नए इनक्यूबेशन केंद्र RETINA (Research Entrepreneurship for Translation, Innovation and Navigation) का भी उद्घाटन किया।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत में उन्नत सौर सेल निर्माण तकनीक का स्वदेशी विकास वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता और नवाचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि अशोक कुमार बरुआ द्वारा विकसित यह प्रणाली भारत में अमोर्फस सिलिकॉन सौर सेल विकास की दिशा में अग्रणी पहल रही है और देश की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ती है।

RETINA इनक्यूबेशन केंद्र के बारे में उन्होंने कहा कि देश के वैज्ञानिक संस्थान अब बुनियादी शोध को उद्यमिता, स्टार्टअप संस्कृति और सामाजिक उपयोग से जोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय विज्ञान का भविष्य प्रयोगशालाओं में हुए शोध को सस्ती और बड़े स्तर पर उपयोगी तकनीकों में बदलने में है, जिससे स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत सामग्री और सतत विकास जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल किया जा सके।

मंत्री ने संस्थान द्वारा क्वांटम सामग्री, नैनो टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बैटरी सामग्री, कैंसर जीवविज्ञान और पर्यावरण तकनीकों में किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की।

-(इनपुटःएजेंसी)