प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) भारत की विकास रणनीति का अहम हिस्सा है, क्योंकि यह समृद्धि, सतत विकास और राष्ट्रीय शक्ति को एक साथ जोड़ती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की पहल जैसे सागरमाला, डीप ओशन मिशन और हरित सागर गाइडलाइंस समुद्री संसाधनों का उपयोग कर रही हैं। इसके साथ ही ये योजनाएं तटीय समुदायों को सशक्त, नई तकनीक, नवाचार और वैश्विक महासागर प्रशासन में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को मजबूत कर रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के उस लेख के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने ब्लू इकोनॉमी के महत्व को विस्तार से बताया है। लेख में कहा गया है कि भारत के पास 11,098 किलोमीटर लंबा समुद्री तट और 24 लाख वर्ग किलोमीटर का विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) है, जिसके जरिये भारत समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग से 100 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बना सकता है। इससे लाखों नौकरियां पैदा होंगी, तटीय समुदायों को सहारा मिलेगा, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा होगी और वैश्विक समुद्री क्षेत्र में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।
डॉ. सिंह ने कहा कि हम अब “ब्लू इकोनॉमी 2.0” के दौर में हैं, जहां केवल पारंपरिक क्षेत्रों पर नहीं, बल्कि नए और उभरते हुए क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि डीप ओशन मिशन के तहत भारतीय वैज्ञानिक “मत्स्य” नामक पनडुब्बी की मदद से गहरे समुद्र का अध्ययन कर रहे हैं, जिससे रणनीतिक संसाधनों की खोज और आधुनिक तकनीक का विकास संभव हो सकेगा। सागरमाला कार्यक्रम बंदरगाहों को आधुनिक बना रहा है, जिससे व्यापार आसान हो रहा है और प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। वहीं प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PM MSY) मत्स्य पालन क्षेत्र में “ब्लू रिवॉल्यूशन” ला रही है और तटीय समुदायों को सीधा लाभ पहुंचा रही है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ने पांच साल पूरे कर लिए हैं और इस दौरान भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन गया है। 2019-20 में जहां मछली उत्पादन 141.64 लाख टन था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 195 लाख टन हो गया है, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 8% है। मछली निर्यात भी 2019-20 के 46,662.85 करोड़ रुपए से बढ़कर 2023-24 में 60,524.89 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इस योजना के तहत दिसंबर 2024 तक 58 लाख रोजगार सृजित हुए हैं, जो 55 लाख के लक्ष्य से अधिक है। इसमें 99,018 महिलाओं को सशक्त बनाया गया है और 2020-21 से 2024-25 तक 4,061.96 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र को पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित, आर्थिक रूप से मजबूत और सामाजिक रूप से समावेशी बनाना है। इसमें उत्पादन, उत्पादकता, गुणवत्ता, तकनीक और प्रसंस्करण के बुनियादी ढांचे की खामियों को दूर किया जा रहा है। खास बात यह है कि महिलाओं की भागीदारी पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पीएमएमएसवाई के तहत महिला उद्यमियों को लाभार्थी गतिविधियों और एंटरप्रेन्योर मॉडल में 60% तक वित्तीय सहायता (प्रति परियोजना ₹1.5 करोड़ तक) दी जाती है, जिससे महिलाओं को आय के नए अवसर मिल रहे हैं और वे अपने समुदायों में मजबूत भूमिका निभा रही हैं।-(IANS)


