कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा चलाया जा रहा राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ मृदा स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक उपयोग और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में बड़ी सफलता हासिल कर रहा है। अभियान के जरिए अब तक 2.712 करोड़ नागरिकों तक पहुंच बनाई गई है, जबकि 7.17 लाख किसानों को सीधे तौर पर संतुलित उर्वरक उपयोग और वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में जागरूक किया गया है।
देशभर में आयोजित हुए 12,979 जागरूकता शिविर
अभियान के तहत अब तक कुल 12,979 जागरूकता शिविर और सेमिनार आयोजित किए गए हैं। इसके अलावा क्षमता निर्माण के उद्देश्य से 3,145 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 1,11,509 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। किसानों को व्यावहारिक जानकारी देने के लिए हरी खाद, जैव उर्वरक और जैविक स्रोतों पर आधारित 7,928 क्षेत्रीय प्रदर्शन भी किए गए।
पंचायतों और जनप्रतिनिधियों की भी रही सक्रिय भागीदारी
जमीनी स्तर पर अभियान को प्रभावी बनाने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों, सरपंचों और जिला परिषद सदस्यों की भागीदारी के साथ 4,916 जनप्रतिनिधि सम्मेलन आयोजित किए गए। वहीं उर्वरक डीलरों के साथ 9,609 संवाद कार्यक्रम आयोजित कर संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाई गई।
एफपीओ और स्वयं सहायता समूहों को भी जोड़ा गया
अभियान में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और किसान समूहों (एफआईजी) की भी सक्रिय भागीदारी रही। इनके माध्यम से 8,383 किसान सदस्यों को अभियान से जोड़ा गया।
रेडियो, टीवी और सोशल मीडिया के जरिए व्यापक प्रचार
व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए देशभर में 53,616 स्थानों पर बैनर, पोस्टर और होर्डिंग्स लगाए गए। इसके अलावा 944 रेडियो वार्ता और 200 टीवी एवं डिजिटल कार्यक्रमों सहित कुल 1,144 मीडिया प्रसारणों के जरिए किसानों तक संदेश पहुंचाया गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल प्रचार ने अभियान की पहुंच 2.712 करोड़ लोगों तक पहुंचा दी।
मृदा स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि पर है फोकस
‘खेत बचाओ अभियान’ का मुख्य उद्देश्य मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देना और रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना है। इसके जरिए मृदा की उर्वरता बनाए रखने और दीर्घकालिक कृषि स्थिरता सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। (इनपुट: पीआईबी)


