इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में छठे नदी उत्सव का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नदियों पर शॉर्ट टर्म, मिड टर्म और लॉन्ग टर्म योजनाओं के तहत काम हो रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वॉटर विजन@2047 के तहत अथक प्रयास जारी हैं। उद्घाटन समारोह में सी.आर. पाटिल के साथ आईजीएनसीए के अध्यक्ष रामबहादुर राय, इस्कॉन के आध्यात्मिक नेता गौरांग दास, सामाजिक कार्यकर्ता साध्वी विशुद्धानंद और आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी मौजूद रहे। इस मौके पर पिछले वर्ष के शोध पत्रों के संकलन की पुस्तिका और नदी उत्सव से जुड़ा पोर्टल भी लॉन्च किया गया। कार्यक्रम की खासियत यह रही कि अतिथियों को दिए गए स्मृति चिन्ह मानव-निर्मित नहीं बल्कि नदियों से बहकर आए ड्रिफ्ट वुड से बनाए गए थे।
अपने संबोधन में सी.आर. पाटिल ने नदियों को सिर्फ संसाधन नहीं बल्कि संस्कृति और संवेदना की धारा बताया। उन्होंने कहा कि गंगा जैसी महान नदियां हमारी पहचान हैं और उनका संरक्षण हर नागरिक की जिम्मेदारी है। रामबहादुर राय ने याद दिलाया कि 1980 के दशक में यमुना में 26 नाले गिरते थे, जो नदियों के संकट की गंभीरता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आज जो प्रयास हो रहे हैं, उनसे यमुना की सफाई की उम्मीद जगी है। गौरांग दास ने नदियों को शक्ति और जीवन की निरंतर प्रगति का प्रतीक बताया और कहा कि जैसे गंगा बाधाओं के बीच भी अपना रास्ता खोज लेती है, वैसे ही हमें भी विपरीत परिस्थितियों में आशा बनाए रखनी चाहिए। साध्वी विशुद्धानंद ने ईशान्य से कन्याकुमारी तक के अपने अनुभव साझा करते हुए नदियों की पारिस्थितिक विविधता पर ध्यान देने की अपील की।
तीन दिवसीय उत्सव की शुरुआत ‘रिवरस्केप डायनेमिक्स, चेंजेस एंड कंटिन्युटी’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी से हुई। इसमें 300 से अधिक शोध पत्र आए, जिनमें से 45 प्रस्तुत किए जा रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित इस संगोष्ठी में नदियों के सांस्कृतिक, पारिस्थितिक और कलात्मक पहलुओं पर चर्चा हो रही है। साथ ही ‘माई रिवर स्टोरी’ डॉक्यूमेंट्री फिल्म फेस्टिवल भी आयोजित हुआ, जिसमें गोताखोर: डिसेपेयरिंग डाइविंग कम्यूनिटी, रिवर मैन ऑफ इंडिया, अर्थ गंगा, कावेरी-रिवर ऑफ लाइफ जैसी फिल्में प्रदर्शित की गईं। आज के कार्यक्रम का समापन गुरु सुधा रघुरामन और उनकी टीम के शास्त्रीय गायन से हुआ, जिसने दर्शकों का मन मोह लिया।
यह नदी उत्सव 27 सितंबर तक चलेगा, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियां और चर्चाएं होंगी। इसका उद्देश्य नदियों, पारिस्थितिकी और संस्कृति के बीच गहरे रिश्तों को मजबूत करना है।


