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रामलीला के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को रोका

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को स्थगित कर दिया, जिसमें उत्तर प्रदेश के टुंडला में एक स्कूल के खेल मैदान पर रामलीला कार्यक्रम आयोजित करने पर रोक लगाई गई थी।

जस्टिस सूर्या कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि “उत्सव जारी रह सकते हैं, बशर्ते छात्रों को कोई असुविधा न हो और उनके खेल गतिविधियों में कोई बाधा न आए।” इस बेंच में जस्टिस उज्जल भुयान और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह भी शामिल थे।

सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान सवाल किया कि आखिर क्यों याचिकाकर्ता ने अचानक इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया और पहले क्यों नहीं अपील की, जबकि रामलीला का आयोजन शुरू हो चुका था। कोर्ट ने पूछा, “पिछले 100 सालों से यह आयोजन हो रहा है, तो आप अब क्यों विरोध कर रहे हैं? आप छात्र नहीं हैं, न माता-पिता हैं, न इस जमीन के मालिक हैं, फिर भी आप PIL क्यों दाखिल कर रहे हैं?”

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को स्थगित करते हुए कहा कि, इस मामले में एक वैकल्पिक स्थल तलाशने के लिए निर्देश दिए जाएं, ताकि स्कूल का मैदान पूरी तरह छात्रों के लिए सुरक्षित रहे।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पहले एक PIL में कहा था कि सरकारी स्कूल के मैदान को इवेंट स्थल में बदलने के लिए पूरे मैदान में सीमेंट इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाई गई हैं, जिससे बच्चों को खेलने की जगह नहीं मिल रही। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि स्कूल के मुख्य द्वार को ‘सीता राम गेट’ में बदल दिया गया है और वहां झूलों जैसी संरचनाएँ लगाई गई हैं।

इस PIL में यह चिंता जताई गई थी कि रामलीला के आयोजन से स्कूल की पढ़ाई पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि इस दौरान लगभग 18 दिनों तक स्कूल परिसर में मंच और अन्य संरचनाएँ लगाई जाएंगी।

उत्तर प्रदेश सरकार और नगर पालिका परिषद के अधिकारियों ने कहा कि टाइल्स लगाई गई हैं क्योंकि मैदान में जलभराव की समस्या थी, लेकिन हाई कोर्ट ने पूछा कि क्या इस टाइलिंग के बाद खेल गतिविधियाँ हो सकती हैं, तो जवाब “नहीं” था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा था कि बिना अनुमति और स्पष्ट आयोजनकर्ता के इस तरह का आयोजन “अवैध” है और स्कूल परिसर का इस तरह के कार्यक्रम के लिए उपयोग की अनुमति देना गलत है।