पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: शांतिपूर्ण चुनाव और रिकॉर्ड मतदान के पीछे CEO ऑफिस के ‘तीन योद्धा’

2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव कई मायनों में यादगार रहे। राज्य के हिंसक चुनावी इतिहास को तोड़ते हुए इस बार मतदान शांतिपूर्ण रहा और मतदान प्रतिशत राष्ट्रीय स्तर पर सर्वकालिक उच्चतम स्तर पहुंच गया।

इस सफलता का पूरा श्रेय मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को जाता है, जिन्होंने शुरू से अंत तक पर्दे के पीछे रहकर पूरे चुनावी प्रक्रिया को कुशलतापूर्वक संभाला। इन्‍हें ‘तीन मुसाफिर’ के नाम से भी जाना जा रहा है।

ये हैं वो तीन अधिकारी

ये तीन अधिकारी हैं — पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल, विशेष चुनाव पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता और विशेष पुलिस पर्यवेक्षक एन.के. मिश्रा। पिछले साल नवंबर में शुरू हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान से लेकर मतदान और वोटों की गिनती तक, इन तीनों ने हर चुनौती का डटकर मुकाबला किया। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी सरकार की ओर से इनके सामने मौखिक हमले, प्रशासनिक असहयोग, बदनामी और कानूनी अड़चनों की भरमार रही, लेकिन तीनों अधिकारियों ने पेशेवर तरीके से हर रुकावट को पार किया।

मनोज कुमार अग्रवाल (CEO)

1990 बैच के आईएएस अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल निर्वाचन आयोग की पहली पसंद थे। शांत स्वभाव और पारदर्शिता के लिए मशहूर अग्रवाल का ही सुझाव था कि इस बार चुनाव सिर्फ दो चरणों में कराए जाएं (पिछली बार 6-7 चरणों में होते थे)। उनका हर फैसला दिल्ली स्थित ईसीआई मुख्यालय ने बिना सवाल पूछे स्वीकार किया।

सुब्रत गुप्ता (विशेष चुनाव पर्यवेक्षक)

1990 बैच के रिटायर्ड आईएएस और आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र सुब्रत गुप्ता ने टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बेहतरीन इस्तेमाल कर चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया। SIR के दौरान संदिग्ध वोटरों की पहचान और नकली वोटरों को हटाने में AI ने अहम भूमिका निभाई। वोटिंग के दौरान गड़बड़ियों को भी इसी तकनीक से रोका गया।

एन.के. मिश्रा (विशेष पुलिस पर्यवेक्षक)

1988 बैच के रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी एन.के. मिश्रा पश्चिम बंगाल को अच्छी तरह जानते हैं। उन्होंने केंद्रीय बलों की प्रभावी तैनाती, लामबंदी और उपयोगी व्यवस्था की, जिसकी वजह से पूरे चुनाव में शांति बनी रही।

CEO कार्यालय के एक अधिकारी ने कहा, “तीनों अधिकारियों की सूझबूझ, समन्वय और दृढ़ता की वजह से आजादी के बाद सबसे शांतिपूर्ण और सबसे ज्यादा मतदान प्रतिशत वाला चुनाव संभव हो सका।” इस बार बंगाल में लोकतंत्र की जीत इन तीन ‘अदृश्य योद्धाओं’ की वजह से हुई है। (इनपुट-एजेंसी)