ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम को बिना किसी समय सीमा के बढ़ाया, नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ अपने युद्धविराम को बढ़ा दिया है, जबकि व्यापक नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखी गई है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि बातचीत के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं है और तेहरान पर आर्थिक दबाव जारी रखने के संकेत दिए हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लीविट ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका दोहरी रणनीति अपना रहा है-सैन्य हमलों को रोकते हुए वित्तीय और समुद्री प्रतिबंधों को और कड़ा किया जा रहा है।

उन्होंने कल बुधवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धविराम के विस्तार की घोषणा की है और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के कारण पूरी तरह बदनाम हो चुके एक शासन को उदारता से कुछ लचीलापन भी दिया है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि सैन्य कार्रवाई में विराम का मतलब दबाव में कमी नहीं है। उन्होंने कहा, “सैन्य और प्रत्यक्ष हमलों पर युद्धविराम है लेकिन ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी’ जारी है और प्रभावी व सफल नौसैनिक नाकेबंदी भी जारी है।”

व्हाइट हाउस के अनुसार, इस नाकेबंदी से ईरान को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। लीविट ने कहा, “हम इस नाकेबंदी के जरिए उनकी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह जकड़ रहे हैं। उन्हें रोज़ 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है,” और जोड़ा कि ईरान तेल की खेप भेजने या भुगतान बनाए रखने में असमर्थ है।
आर्थिक दबाव बढ़ने के बावजूद, प्रशासन ने बातचीत के लिए कोई समय-सीमा तय करने से परहेज किया है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ने कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की है, अंततः समय-सीमा का निर्धारण कमांडर-इन-चीफ द्वारा किया जाएगा,” और बातचीत के लिए कम समय होने की खबरों को खारिज किया।

जब उनसे पूछा गया कि क्या युद्धविराम या नाकेबंदी अनिश्चित काल तक जारी रहेगी, तो लीविट ने स्पष्ट जवाब देने से इनकार कर दिया और कहा कि राष्ट्रपति ही तय करेंगे कि “कब उन्हें लगे कि यह संयुक्त राज्य अमेरिका और अमेरिकी जनता के हित में है।” उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के नेतृत्व के भीतर मतभेद बातचीत को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “अंदरूनी स्तर पर काफी विभाजन है… व्यवहारिक लोगों और कट्टरपंथियों के बीच संघर्ष चल रहा है,” और बताया कि वॉशिंगटन तेहरान से “एकजुट प्रतिक्रिया” का इंतजार कर रहा है।

व्हाइट हाउस ने माना कि ईरान से आने वाले विरोधाभासी संकेतों ने प्रक्रिया को जटिल बना दिया है। लीविट ने कहा, “वे सार्वजनिक रूप से जो कहते हैं, वह निजी तौर पर अमेरिका से कही गई बातों से काफी अलग है,” और आधिकारिक ईरानी बयानों पर पूरी तरह भरोसा न करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी वार्ताकार पहले ही ईरानी समकक्षों से सीधे संपर्क कर चुके हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि अंततः निर्णय लेने का अधिकार किसके पास है।

प्रशासन के रुख का बचाव करते हुए लीविट ने कहा कि वॉशिंगटन के पास बढ़त है। उन्होंने कहा, “इस समय सभी पत्ते राष्ट्रपति ट्रंप के हाथ में हैं… ईरान बहुत कमजोर स्थिति में है।”

उन्होंने कहा कि संकट के दौरान राष्ट्रपति के सार्वजनिक बयानबाजी से बातचीत पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है। “संयुक्त राज्य अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप अपनी मांगों और ‘रेड लाइन्स’ को लेकर बहुत स्पष्ट रहे हैं,” उन्होंने कहा।

अलग से, लीविट ने बताया कि प्रशासन विमानन क्षेत्र के घटनाक्रमों पर नजर रख रहा है, खासकर स्पिरिट एयरलाइंस के संभावित राहत पैकेज की खबरों के बीच, लेकिन इस पर कोई विवरण नहीं दिया। (इनपुट-आईएएनएस)

 

 

RELATED ARTICLES

3 hours ago | Donald Trump Iran Sanctions

ट्रंप के दावे पर ईरान का पलटवार: होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रतिबंध अब भी बरकरार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंध हटाने के दावे के बावजूद ई...

30/05/26 | 12:43 pm | Bodh Gaya Myanmar President welcome

बोधगया पहुंचे म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग, राज्यपाल हसनैन ने किया स्वागत

म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग ने अपने भारत दौरे की शुरुआत बिहार के बोधगया से की, जहां उ...

30/05/26 | 11:47 am | Ajit Doval Moscow security forum

आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त रुख, सीमा पार समर्थन देने वाले देशों पर वैश्विक कार्रवाई की अपील

विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर क...