कौशल भारत मिशन के तहत युवाओं को एआई, ग्रीन एनर्जी और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में मिल रहा प्रशिक्षण

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के तहत संचालित कौशल भारत मिशन के माध्यम से देशभर में युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल, पुनर्कौशल और कौशलोन्नयन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस), राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस) और शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) के जरिए कौशल विकास केंद्रों और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार का फोकस कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ग्रीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन जैसे उभरते क्षेत्रों में युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने पर है।

पीएमकेवीवाई, जेएसएस और एनएपीएस के तहत जारी हुई राशि

मंत्रालय की योजनाओं के तहत पिछले पांच वर्षों में अलग-अलग मदों में राशि जारी की गई है। पीएमकेवीवाई के तहत 2021-22 में 643.77 करोड़ रुपये, 2022-23 में 305.46 करोड़ रुपये, 2023-24 में 839.18 करोड़ रुपये, 2024-25 में 1,553.13 करोड़ रुपये और 2025-26 में 279.30 करोड़ रुपये जारी किए गए। जेएसएस के तहत इसी अवधि में क्रमश: 137.63 करोड़, 154.65 करोड़, 154.37 करोड़, 139.55 करोड़ और 148.23 करोड़ रुपये जारी हुए। एनएपीएस के तहत 177.07 करोड़, 309.03 करोड़, 594.30 करोड़, 585.96 करोड़ और 577.03 करोड़ रुपये जारी किए गए।

पीएमकेवीवाई के तहत 24.38 लाख उम्मीदवारों को मिला नियोजन

पीएमकेवीवाई 1.0, 2.0 और 3.0 के अल्पकालिक प्रशिक्षण घटक के तहत वित्त वर्ष 2015-16 से 2021-22 तक कुल 1.11 करोड़ उम्मीदवार प्रमाणित हुए। इनमें से 24.38 लाख उम्मीदवारों को योजना के अल्पकालिक प्रशिक्षण घटक के तहत नियोजन मिला। पीएमकेवीवाई 4.0 में प्रशिक्षित उम्मीदवारों को विभिन्न करियर विकल्प चुनने के लिए सशक्त बनाने और उनके अनुरूप प्रशिक्षण देने पर जोर दिया जा रहा है।

पीएमकेवीवाई 4.0 से रोजगार और आय में सुधार

पीएमकेवीवाई 4.0 के स्वतंत्र तृतीय-पक्ष प्रभाव मूल्यांकन में रोजगार परिणामों में सुधार सामने आया है। प्रशिक्षण से पहले नियोजित और स्व-नियोजित एसटीटी उम्मीदवारों का संयुक्त हिस्सा 26.6 प्रतिशत था, जो प्रशिक्षण के बाद बढ़कर 45.4 प्रतिशत हो गया। यानी इसमें 18.8 प्रतिशत अंकों की वृद्धि हुई। वहीं, 41.4 प्रतिशत एसटीटी और 48.9 प्रतिशत आरपीएल उम्मीदवारों ने प्रशिक्षण और प्रमाणन के बाद आय में वृद्धि दर्ज की।

जेएसएस में महिलाओं की भागीदारी 82 प्रतिशत

2025 में किए गए जेएसएस के तृतीय-पक्ष मूल्यांकन के अनुसार 33.94 लाख लोगों ने योजना में नामांकन कराया, जिनमें से 32 लाख प्रशिक्षित और 31.52 लाख प्रमाणित हुए। कुल प्रतिभागियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 82 प्रतिशत रही। वहीं, 73 प्रतिशत लाभार्थी हाशिए पर आने वाले वर्गों से थे, जिनमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति की हिस्सेदारी 36 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग की 37 प्रतिशत थी।

जेएसएस प्रशिक्षण से आय सृजन में बढ़ोतरी

मूल्यांकन के अनुसार, 90 प्रतिशत पूर्व प्रशिक्षु अर्जित कौशल का इस्तेमाल आय सृजन के लिए कर रहे हैं। 82 प्रतिशत प्रशिक्षण के छह महीने के भीतर आर्थिक रूप से सक्रिय हो गए, जबकि पहले आय अर्जित नहीं करने वाले 60 प्रतिशत लोगों ने प्रशिक्षण के बाद कमाई शुरू की। लाभार्थियों की औसत मासिक आय में चार गुना वृद्धि दर्ज की गई।

एनएपीएस में 34.69 लाख प्रशिक्षुओं को मिला रोजगार

वित्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक 30 नवंबर 2025 के आंकड़ों के आधार पर किए गए मूल्यांकन में सामने आया कि पीएमएनएपीएस-2 के तहत 46 लाख के संचयी लक्ष्य के मुकाबले 34.69 लाख प्रशिक्षुओं को रोजगार मिला। यह करीब 75 प्रतिशत की उपलब्धि है। योजना के तहत प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) से वित्तीय पारदर्शिता और पूर्वानुमान में भी सुधार हुआ है।

एआई और रोबोटिक्स समेत भविष्य के कौशल पर जोर

पीएमकेवीवाई 4.0 के तहत ‘फ्यूचर स्किल्स’ श्रेणी में विशेष जॉब रोल शुरू किए गए हैं। एआई, रोबोटिक्स, ग्रीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण को स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। उद्योग भागीदारी के जरिए पाठ्यक्रम तैयार करने, रोजगार उपलब्ध कराने और बाजार की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित करने पर भी जोर है।

266 निर्धारित और 750 से अधिक वैकल्पिक व्यवसायों में प्रशिक्षण

राष्ट्रीय शिक्षुता कार्यक्रम के तहत 266 निर्धारित व्यवसायों और एआई तथा रोबोटिक्स सहित 750 से अधिक वैकल्पिक व्यवसायों में शिक्षुता प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण महानिदेशालय ने आईटीआई और राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों में एआई, मेकाट्रॉनिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, साइबर सुरक्षा और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों के नए युग के पाठ्यक्रम शुरू किए हैं।

आईबीएम, माइक्रोसॉफ्ट और सिस्को समेत कंपनियों से साझेदारी

डिजिटल कौशल प्रशिक्षण को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षण महानिदेशालय ने आईबीएम, सिस्को, अमेजन वेब सर्विसेज और माइक्रोसॉफ्ट जैसी प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ समझौते किए हैं। इन साझेदारियों के माध्यम से एआई, बिग डेटा एनालिटिक्स, ब्लॉकचेन और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों में तकनीकी और व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

स्किल इंडिया डिजिटल हब पर एआई-एमएल के कई पाठ्यक्रम

मंत्रालय ने स्किल इंडिया डिजिटल हब (सिद्ध) लॉन्च किया है। यह उद्योग से जुड़े पाठ्यक्रम, रोजगार के अवसर और उद्यमिता सहायता उपलब्ध कराने वाला एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसके तहत एआई और मशीन लर्निंग से जुड़े शुरुआती से लेकर उन्नत स्तर तक के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।

एआई कौशल के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम

राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीएआई) कौशल ढांचा विकसित किया है। यह एआई, डेटा साइंस और उभरती प्रौद्योगिकियों में कौशल विकास के लिए राष्ट्रीय रोडमैप और दिशानिर्देश उपलब्ध कराता है तथा उद्योग-अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने का आधार प्रदान करता है।

स्कूली छात्रों के लिए ‘एसओएआर’ पहल

मंत्रालय ने ‘स्किलिंग फॉर एआई रेडीनेस’ (एसओएआर) पहल शुरू की है। इसका उद्देश्य कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों में एआई जागरूकता और बुनियादी कौशल विकसित करना तथा शिक्षकों में एआई साक्षरता बढ़ाना है। इसके जरिए विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में एआई शिक्षा की समान पहुंच सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।

वैश्विक डिजिटल नौकरियों के लिए तैयार हो रहे युवा

पीएमकेवीवाई 4.0 के पाठ्यक्रमों में एआई/एमएल फाउंडेशन और एडवांस्ड, रोबोटिक प्रोसेस ऑटोमेशन, ड्रोन पायलट टेक्नीशियन, इंडस्ट्रियल आईओटी और डेटा एनालिटिक्स जैसे पाठ्यक्रम शामिल हैं। स्किल इंडिया डिजिटल हब के माध्यम से वैश्विक स्तर पर नौकरियों से कौशल का मिलान किया जा रहा है। रोजगार मेलों और प्लेसमेंट गतिविधियों के जरिए रोजगार संबंध स्थापित किए जा रहे हैं।

योजनाओं की डिजिटल और बहुस्तरीय निगरानी

पीएमकेवीवाई के तहत उम्मीदवारों, प्रशिक्षण प्रदाताओं और रोजगार परिणामों को स्किल इंडिया डिजिटल हब पर ट्रैक किया जाता है। प्रशिक्षण केंद्रों में आधार-सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली अनिवार्य है। कॉल सत्यापन, अचानक निरीक्षण, वर्चुअल सत्यापन और परिणाम-आधारित भुगतान जैसे तरीकों से प्रशिक्षण केंद्रों की निगरानी की जाती है।

एनएपीएस और जेएसएस की भी नियमित निगरानी

एनएपीएस की निगरानी के लिए केंद्रीय स्तर पर राष्ट्रीय संचालन समिति और योजना निगरानी एवं समीक्षा समिति गठित हैं। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर राज्य कार्यान्वयन समीक्षा समितियां काम करती हैं। वहीं, जेएसएस की निगरानी आवधिक समीक्षा बैठकों, क्षेत्रीय दौरों और स्किल इंडिया डिजिटल हब के माध्यम से की जाती है। क्षेत्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता निदेशालय भी जेएसएस का निरीक्षण करता है।

आईटीआई पाठ्यक्रमों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाया जा रहा

प्रशिक्षण महानिदेशालय समय-समय पर आईटीआई की संबद्धता और मानकों की समीक्षा करता है। सीटीएस के पाठ्यक्रमों को उद्योग भागीदारों के परामर्श से नियमित रूप से अपडेट किया जाता है, ताकि नवीनतम तकनीकी प्रगति और बदलती कौशल जरूरतों को शामिल किया जा सके। संबंधित राज्य सरकारें केंद्र के समन्वय से आईटीआई का संयुक्त निरीक्षण भी करती हैं। (इनपुट: पीआईबी)