केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को संसद में वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया। यह बजट कर्तव्य भवन में तैयार किया गया पहला बजट है, जिसे तीन प्रमुख कर्तव्यों- आर्थिक विकास को गति देना, लोगों की आकांक्षाओं को सशक्त करना और सबका साथ-सबका विकास सुनिश्चित करने, से प्रेरित बताया गया है।
बजट में सरकार ने वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत, आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाने पर विशेष ज़ोर दिया है।
बजट अनुमान और राजकोषीय स्थिति
वर्ष 2026-27 के लिए गैर-ऋण प्राप्तियां 36.5 लाख करोड़ रुपये और कुल व्यय 53.5 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियां 28.7 लाख करोड़ रुपये आंकी गई हैं। सकल बाजार उधारी 17.2 लाख करोड़ रुपये तथा शुद्ध बाजार उधारी 11.7 लाख करोड़ रुपये रहने की संभावना है।
राजकोषीय घाटा 2026-27 में जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि ऋण-जीडीपी अनुपात घटकर 55.6 प्रतिशत होने की उम्मीद है, जो वित्तीय अनुशासन की दिशा में सरकार के प्रयासों को दर्शाता है।
आर्थिक विकास को गति देने पर ज़ोर
पहले कर्तव्य के तहत सरकार ने विनिर्माण और अवसंरचना को विकास का प्रमुख इंजन बताया है। बायोफार्मा शक्ति की घोषणा करते हुए अगले पाँच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव किया गया है, जिससे भारत को वैश्विक बायोफार्मा विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।
तीन नए राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान बनाए जाएंगे और सात मौजूदा संस्थानों का उन्नयन किया जाएगा। इसके साथ ही 1,000 से अधिक मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की शुरुआत, इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जा विनिर्माण योजना के बजट को 40,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाना और दुर्लभ धातु गलियारों की स्थापना से भारत की औद्योगिक क्षमता को मजबूती देने का लक्ष्य रखा गया है।
पूंजीगत सामान और वस्त्र क्षेत्र को बढ़ावा
पूंजीगत सामान निर्माण को सशक्त करने के लिए हाईटेक टूल रूम, कंटेनर विनिर्माण योजना और निर्माण संवर्धन अवसंरचना उपकरण योजना की घोषणा की गई है।
वस्त्र क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय फाइबर नीति, मेगा टेक्सटाइल पार्क और खादी, हथकरघा व हस्तशिल्प को मज़बूती देने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल शुरू की जाएगी, जिससे ग्रामीण रोजगार और वैश्विक ब्रांडिंग को बढ़ावा मिलेगा।
अवसंरचना और कनेक्टिविटी
वित्त वर्ष 2026-27 में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा। नए समर्पित माल गलियारे, राष्ट्रीय जलमार्गों का विस्तार, सी-प्लेन सेवा और तटीय कार्गो प्रमोशन स्कीम से लॉजिस्टिक्स और संपर्क व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा।
कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण तकनीकों के लिए 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान कर दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाया गया है।
लोगों की क्षमता और आकांक्षाओं पर फोकस
दूसरे कर्तव्य के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास को प्राथमिकता दी गई है। ‘शिक्षा से रोजगार एवं उद्यम’ स्थायी समिति का गठन कर सेवा क्षेत्र को विकसित भारत का मुख्य चालक बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में एक लाख संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवर जोड़े जाएंगे और वृद्धों की देखभाल सेवाओं को सुदृढ़ किया जाएगा। आयुष क्षेत्र में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना और पारंपरिक चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा।
ऑरेंज इकोनॉमी के अंतर्गत रचनात्मक उद्योगों को प्रोत्साहन, शिक्षा में विश्वविद्यालय टाउनशिप, महिला छात्रावास और पर्यटन गाइडों के कौशल विकास की योजनाएं भी घोषित की गई हैं।
सबका साथ-सबका विकास की दिशा में कदम
तीसरे कर्तव्य के अंतर्गत किसानों की आय बढ़ाने, उच्च मूल्य वाली कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया गया है। नारियल, काजू और कोको को वैश्विक ब्रांड बनाने के लिए समर्पित कार्यक्रम लाया जाएगा।
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में औद्योगिक व पर्यटन विकास तथा राज्यों को 1.4 लाख करोड़ रुपये के वित्त आयोग अनुदान से संतुलित क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।
कर सुधार और व्यापार सुगमता
नया आयकर अधिनियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा, जिससे कर व्यवस्था सरल और पारदर्शी बनेगी। छोटे करदाताओं को राहत, मुकदमेबाजी में कमी और आईटी व डेटा सेंटर सेवाओं को प्रोत्साहन देने के प्रावधान किए गए हैं।
अप्रत्यक्ष करों में सीमा शुल्क सरलीकरण, ऊर्जा संक्रमण, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और दवाओं पर छूट से उद्योग और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026-27 को सरकार ने विकसित भारत 2047 की दिशा में एक मजबूत और समावेशी कदम बताया है।


