भारत को चिप इंडस्ट्री के लिए क्रिटिकल मटीरियल का मजबूत इकोसिस्टम बनाना होगा: अश्विनी वैष्णव

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भारत की सबसे बड़ी कमजोरियों में से एक क्रिटिकल मटीरियल (जरूरी सामग्री) पर निर्भरता है। उन्होंने सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के लिए घरेलू क्षमताएं तेजी से विकसित करने पर जोर दिया। ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जरूरी मटीरियल की ग्लोबल सप्लाई चेन कुछ ही देशों तक सीमित है। यह स्थिति भारत के भरोसेमंद टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग हब बनने के लक्ष्य के लिए बड़ी चुनौती है।

किन क्षेत्रों पर देना होगा फोकस?

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने केमिकल, गैस, सबस्ट्रेट और अन्य सेमीकंडक्टर इनपुट को ऐसे अहम क्षेत्र बताया जहां भारत को घरेलू विशेषज्ञता और उत्पादन क्षमता मजबूत करनी होगी। उन्होंने कहा कि जिन देशों का अभी मटीरियल इकोसिस्टम पर दबदबा है, उन्होंने ये क्षमताएं बनाने में दशकों लगाए हैं। लेकिन भारत के पास इतना समय नहीं है। इसलिए मैन्युफैक्चरिंग, प्रोसेसिंग, स्टोरेज और हैंडलिंग में विशेषज्ञता विकसित करने के प्रयासों में तेजी लानी होगी।

सेमीकंडक्टर मिशन का नया चरण

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब सिर्फ चिप बनाने और असेंबल करने तक सीमित नहीं है। यह एक पूरा इकोसिस्टम बनाने की दिशा में बढ़ रहा है, जिसमें मटीरियल, केमिकल, गैस और सबस्ट्रेट भी शामिल हैं। देश के सेमीकंडक्टर प्रोग्राम के दूसरे चरण में इन क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का तरीका व्यवस्थित है—पहले तैयार उत्पादों को असेंबल करना, फिर मॉड्यूल, कंपोनेंट, मटीरियल और अंत में कैपिटल इक्विपमेंट बनाने की ओर बढ़ना। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग में टिकाऊ विकास के लिए मजबूत इकोसिस्टम जरूरी है।

आत्मनिर्भरता का मतलब क्या है?

केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता का मतलब दूसरे देशों पर निर्भरता पूरी तरह खत्म करना नहीं है। इसका मकसद रणनीतिक कमजोरियों को दूर करना और अहम क्षेत्रों में मजबूती (resilience) लाना है। उन्होंने कहा, “जब हम टेक्नोलॉजी के मामले में आत्मनिर्भरता की बात करते हैं, तो हमें इसे बहुत परिपक्व और जटिल नजरिए से देखना होगा। हम रणनीतिक निर्भरता और मजबूती के बारे में ज्यादा सोच रहे हैं। वे कौन से उत्पाद और सेगमेंट हैं जिनकी मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन और पूरे उत्पाद के विकास की क्षमताएं हमारे देश में होनी चाहिए? वैल्यू चेन के वे कौन से हिस्से हैं जहां हम दूसरे देशों पर निर्भर रह सकते हैं? टेक्नोलॉजी हमेशा एक ग्लोबल वैल्यू चेन होती है।”

अश्विनी वैष्णव ने उदाहरण देते हुए कहा कि 28-नैनोमीटर से 90-नैनोमीटर रेंज वाले पुराने नोड्स में एक डॉलर की चिप की वजह से दस लाख डॉलर की मशीन का उत्पादन रुक सकता है। भारत खुद को ऐसे देश के रूप में पेश करना चाहता है जिस पर डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और फाइनल प्रोडक्ट के पूरे मूल्यांकन के मामले में भरोसा किया जा सके। (इनपुट-एजेंसी)

RELATED ARTICLES

36 mins ago | Artisan Livelihood

भारत ट्यूलिप से पारंपरिक कारीगरों के उत्पादों को मिला डिजिटल बाजार

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीस...

1 hour ago

33,660 करोड़ रुपए की भव्य योजना से बदलेगा भारत का विनिर्माण इकोसिस्टम

भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य) 33,660 करोड़ रुपए की एक पहल है, जिसका उद्देश्य देशभर में 100 प्लग-एंड-प...